दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 54

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नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनिया में फैल चुकी थी। हर देश में लोग हथियारों की जगह किताबों की ओर बढ़ रहे थे।  पृथ्वी सुबह बच्चों के बीच खड़ा था। उनकी हँसी और पढ़ाई की आवाज़ें उसे सुकून दे रही थीं।  सनाया पास आई और बोली, “अब हमें इस रोशनी को नई पीढ़ी को सौंपना है। यही हमारी असली जिम्मेदारी है।”  पृथ्वी ने दृढ़ता से कहा, “हाँ। अब विश्वास का उत्तराधिकार नई पीढ़ी को देना होगा।”  ---शिक्षा का स्थायी विस्तारटीम ने शिक्षा अभियान को नई पीढ़ी के हाथों सौंपने का निर्णय लिया।  - दिल्ली में युवाओं को