“काली हवेली का श्राप”गया जिले के घने जंगलों के किनारे, जहाँ पहाड़ियाँ आसमान को चूमती हैं, एक पुरानी नेम हवेली खड़ी थी, जिसे गाँव वाले डरते हुए 'काली हवेली' कहते थे। सदियों से इसकी काली दीवारें रहस्यों से लिपटी रहतीं। रात के सन्नाटे में यहाँ से अजीब आवाज़ें आतीं—कभी किसी स्त्री की दिल दहला देने वाली चीख, कभी बच्चों के रोने की फुसफुसाहट, तो कभी लोहे की जंजीरों की खनक। गाँव के बुजुर्ग कहते, "वहाँ देवी का श्राप है। जो गया, वो लौटा ही नहीं।" बच्चे तो नाम लेते ही काँप जाते।लेकिन अमित, एक 28 वर्षीय युवा शोधकर्ता, दिल्ली से