Pishacha - The Mind Eater

(317)
  • 3k
  • 687

सन 1893 की ठंडी रात थी। पहाड़ी गांव के ऊपर धुंध ऐसे लिपटी हुई थी जैसे किसी ने पूरे आकाश को सफेद चादर से ढक दिया हो। उस रात अजीब बात यह थी कि गांव के कुत्ते भी भौंकना भूल गए थे। हवा में एक भारी सन्नाटा था, और उस सन्नाटे के बीच केवल एक घर की खिड़की में टिमटिमाता दिया जल रहा था। वही घर था हरिनारायण का, जो गांव का पढ़ा लिखा आदमी माना जाता था।हरिनारायण पिछले कुछ दिनों से सो नहीं पा रहा था। उसे लगता था कि उसके अपने विचार उसके नहीं रहे। कभी अचानक उसे