डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 33

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काया एक शातिर दिमाग औरत थी। वह भूपेंद्र के चेहरे पर छाई हवाइयों और उसकी उखड़ी सांसों को देखकर समझ गई थी कि मामला कुछ गड़बड़ है। उसे शक होने लगा था कि कहीं अंतिम क्षणों में आकर भूपेंद्र डर न जाए या अपने कदम पीछे न खींच ले। काया ने ठान लिया था कि वह आज ही इस अनिश्चितता का अंत कर देगी। उसे अब कानून का कोई खौफ नहीं था। उसने अपने आस-पड़ोस में ऐसे कई मामले देखे थे जहाँ पति दो-दो पत्नियों को लेकर घूम रहे थे। उसे पता था कि एक बार शादी हो गई, तो