रक्त की प्यास (भाग-1)

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भाग 1: हवेली की पुकारराहुल ने कार का इंजन बंद किया।कुछ सेकंड तक सिर्फ सन्नाटा था। फिर… दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज गूँजी, जो अचानक ही थम गई, जैसे किसी ने उनका गला दबा दिया हो।उसने धीरे-धीरे हवेली की ओर देखा।पुरानी हवेली—टूटी-फूटी, जर्जर, और समय की मार से झुकी हुई। चाँदनी रात में भी उसका रंग काला ही लग रहा था। खिड़कियों पर जंग लगे लोहे के शटर हल्की हवा में चरमराते हुए हिल रहे थे।हवा में एक अजीब सी गंध थी।सड़ी हुई मिट्टी… और कुछ और।कुछ… खून जैसा।राहुल ने गहरी साँस ली।“ये बस एक पुरानी इमारत है,”