तेरे मेरे दरमियान - 93

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जानवी आदित्य को अपने साथ रहने के लिए बोल रही थी तब आदित्य सौचता है --" काश ये तुम रोष मे रहकर कहती जानवी , काश ये पल यही रुक जाता , सुबह होता ही नही । पता नही सुबह होते ही क्या होगा । तुम अभी नशे हो इसिलिए मैं यहां रुकुगां तो गलत होगा । मुझे इसे सुलाकर यहाॉ से चले जाना चाहिए । " जानवी :- क्या हूआ...?आदित्य :- कुछ नही , मैं यही हूँ तुम्हारे पास । आदित्य जानवी के बालो पर हाथ फेरने लगता है , जानवी आदित्य के बाहों मे आ जाती है और वही पर