राधा का संगम - प्रकरण 2 राधा के सपने आसमान की बुलंदी को छूते थे.. अपनी अलग पहचान बनाने के लिये ग्रेजुएशन के साथ पार्ट टाइम जोब शुरू किया था और उसी पैसे से सेक्रेटरी का कोर्स संपन्न किया था. उसी महेनत ने उसे सेक्रेटरी बनने का मौका दिया था. ऊस के लिये राधा ने मेरा तहेदिल से शुक्रिया अदा किया था. वह पहले ही दिन बहुत नर्वस थी. पर मुझे देखकर अपने आप को संभाल लिया था. ऊस में मुझे अपनापन की झलक दिखाई दी थी. मेरी बेबाकी देखकर राधा