इस घर में प्यार मना है - 31

संस्कृति अभी भी सोफे पर बैठी थी। पारो उसके सामने कुर्सी खींचकर बैठ गई। उसके चेहरे पर अब चिंता से ज़्यादा शरारती मुस्कान थी।पारो (धीरे से) बोली - भाभी… एक बात पूछूँ?संस्कृति ने हैरानी से उसे देखा।संस्कृति बोली - क्या?पारो थोड़ा और पास आ गई और फुसफुसाते हुए बोली—कल रात… आपके और जेठजी के बीच कुछ हुआ था क्या?इतना सुनते ही संस्कृति का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया।वो एक पल के लिए चुप रह गई। उसकी नज़रें झुक गईं। पारो मुस्कुरा रही थी और जवाब का इंतज़ार कर रही थी। कुछ सेकंड बाद…संस्कृति ने धीरे-धीरे हां में सिर हिला दिया।