राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 4

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अध्याय 4: रूहानी भूल-भुलैया तहखाने की उस ठंडी और घुटन भरी हवा में आर्यन का दम घुटने लगा था। उसके हाथ में मौजूद डायरी जैसे-जैसे वह पढ़ रहा था, उसे महसूस हो रहा था कि वह कागज़ नहीं, बल्कि किसी की धड़कती हुई खाल को छू रहा है। ऊपर छत पर चिपकी वह औरत—ज़ोया—अचानक एक चीख के साथ नीचे झपटी। आर्यन ने फुर्ती से खुद को एक तरफ फेंका और वह औरत ज़मीन पर किसी जानवर की तरह चारों पैरों पर लैंड हुई। उसकी सफेद आँखों में कोई रहम नहीं था, सिर्फ सदियों पुरानी प्यास थी। "तुम... तुम क्या चाहती