इश्क और अश्क - 75

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झोपड़ी की खाली ज़मीन देखने के बाद प्रणाली रुकी नहीं।पाँव खुद ब खुद उस राह पर चल पड़े — जो शायद दिल को याद थी।नदी।वो जगह — जहाँ वो कितनी बार मिले थे। कभी झगड़ते हुए। कभी हँसते हुए। कभी बिना कुछ कहे — बस साथ बैठे हुए। यह जगह उनकी थी — बिना कहे, बिना तय किए।पर आज —यहाँ भी कोई नहीं था।प्रणाली धीरे धीरे पेड़ों के पास गई। उँगलियों से छाल छुई — जैसे इन पेड़ों से पूछ रही हो — क्या तुमने उसे देखा?पेड़ चुप रहे।वो नदी के किनारे आकर बैठ गई। पानी बह रहा था —