इश्क और अश्क - 76

(21)
  • 594
  • 255

 वर्धान अपनी नम आंखों और दुनिया जीत लेनी वाली मुस्कान से : मै......और फिर —कुछ याद आया।अचानक।जैसे किसी ने ठंडा पानी डाल दिया हो।जो उसको उसके दूत ने बताया था , राजा और प्रणाली के बीच का संवाद :"अब तो अविराज भी युद्ध से आ गया है... तो अब तुम दोनों के विवाह की तैयारी शुरू कर सकते हैं।"वर्धान की मुस्कान धीरे धीरे —फीकी पड़ गई।हथेलियाँ — जो प्रणाली के चेहरे पर थीं — धीरे से हट गईं।एक कदम पीछे।बस एक कदम।पर उस एक कदम में जैसे पूरी दुनिया का फासला था।"प्रणाली..." — आवाज़ बदल गई थी। अब उसमें वो