"वर्धान — छोड़ो उसे!"सायूरी आ गई थी।उसने दोनों को अलग किया — वर्धान को पीछे खींचा, कनिष्क को छुड़ाया।कनिष्क उठा।कपड़े झाड़े।और मुस्कुराया — उसी इत्मीनान से।"अरे वाह..."उसकी नज़र सायूरी पर गई —"मेरी भाभी प्रतियोगिता की उम्मीदवार नंबर दो।"और बिना एक पल रुके — वो चला गया।पत्तों के बीच से। आराम से। जैसे कुछ हुआ ही नहीं।वन में अब सिर्फ दोनों थे।सायूरी ने कनिष्क की पीठ देखी — फिर वर्धान की तरफ मुड़ी।"भाभी प्रतियोगिता...?"उसकी आवाज़ में हैरानी थी — पर आँखों में कुछ और था।"यह सब क्या है वर्धान?"वर्धान ने उसे नहीं देखा।"कुछ नहीं।""मुझसे दूर रहो।"और चलने लगा।सायूरी ने उसका हाथ