शब्द और सत्य - भाग 3

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7: कृष्ण कहाँ हैं?तुमने ढूँढा उसे मूर्तियों में, और मंदिरों की दीवारों में,तुमने खोजा उसे मंत्रों में, और काशी के गलियारों में।पर वो तो बैठा है तेरे भीतर, एक मौन साक्षी बनकर,और तुम भटक रहे हो बाहर, हाथों में माला लेकर।'सबमें कृष्ण' कहने का मतलब, कोई देह की पूजा नहीं,इसका अर्थ है—उस सत्य को जानना, जिसके सिवा दूजा नहीं।वो चींटी की तड़प में भी है, और हाथी की हुंकार में,वो उस बछड़े की आँखों में है, जिसे तुम काटते हो बाज़ार में।अगर 'कण-कण में कृष्ण' हैं, तो फिर ये कैसी हिंसा है?अगर हर जीव में वो बैठा, तो फिर ये