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    कुछ ख्याल सुनोगे?
    by Gadhavi Prince

    सब से पहले एक छोटिशी रचना पेश करता हूं।लडकिचाय के बागानों से निकलती खुशबू लगती हो;लडकी साडी पहना करो अच्छी लगती हो।आइने की नज़र ना लगे तुमको;क्या ईस लीये ...

    सीता: एक नारी - 6
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥ षष्टम सर्ग॥ कितने युगों से अनवरत है सृष्टि-क्रम चलता रहा इस काल के अठखेल में जीवन सतत पलता रहा गतिमान प्रतिक्षण समय-रथ, पल भर कभी रुकता ...

    ऐ जिंदगी
    by Yakshita Patel

    नमस्कार मित्रो... हिन्दीमे कविता लिखने का  ये मेरा पहला प्रयास है,  इसमे कई सारी कमिया हो सकती है, शब्दो की गलतियां भी हो सकती है। आप इसे पढ़कर अपने ...

    सीता: एक नारी - 5
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥पंचम सर्ग॥ संतप्त मन, हिय दाह पूरित, नीर लोचन में लिएमुझको विपिन में छोड़कर लक्ष्मण बिलखते चल दिए निर्लिप्त, संज्ञा शून्य, आगे लड़खड़ाते वे बढ़ेउठते नहीं थे पाँव, ...

    अर्धनिमिलिप्त
    by Er Bhargav Joshi

                                       "अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ???                ...

    ग़ज़ल, कविता, शेर
    by Kota Rajdeep

    प्रेम-जल बरशा बादल से, दरख़्त की हर पत्तियां सुनहरी हों चली हैं।अंगड़ाई लिए नई कोंपलें उठती हैं, जमीं कितनी ताज़ा हो चली हैं।___Rajdeep Kotaएक रोज़ शादाब शामों से दूर जाना होगा।ज़िन्दगी ...

    सीता: एक नारी - 4
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥चतुर्थ सर्ग॥ सहकर थपेड़े अंधड़ों के अनगिनत रहता खड़ा खंडित न होता काल से, बल प्रेम में होता बड़ा पहले मिलन पर प्रीति की जो अंकुरित थी ...

    From Bottom Of Heart - 4
    by Jiya Vora

    1.Kheriyat maat pucho hamari,Hum to sirf unhi ke khwaab mein rehte hai!Unse dur chahe kitne bhi ho fasle,Par hum to sirf unhi ke dil mein dhadak te hai! 2.थे ...

    और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा )
    by Pranava Bharti

    और ख़ामोशी बोल पड़ी  (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------              ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर ...

    सीता: एक नारी - 3
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥तृतीय सर्ग॥ स्वीकार करती बंध जब, सम्मान नारी का तभीहोती प्रशंसित मात्र तब, संतुष्ट जब परिजन सभी भ्राता, पिता, पति, परिजनों की दासता में रत रहेहोती विभूषित ...

    बेनाम शायरी - 1
    by Er Bhargav Joshi

                            "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" ...

    कविता - ‘ माँ ‘
    by प्रतिभा चौहान

      कविताएँ       १'माँ' -कविता ************#प्रतिभा_चौहान_की_कवितायेंतुम बिन इह लोक, जगत मर्माहतसूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायणजीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखातीगुण तेरे ही गाती माँन पड़ता कम ...

    मे और मेरे अह्सास - 12
    by Darshita Babubhai Shah

    मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे ...

    कुछ अछांदस रचनाएं
    by Pranava Bharti

    (कुछ अछांदस रचनाएं)                                                      ...

    एक लड़की
    by Archana Yaduvanshi

    लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो ...

    सीता: एक नारी - 2
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥द्वितीय सर्ग॥ मेरे लिए जो था प्रतीक्षित वह समय भी आ गयारण बीच रावण बन्धु-बांधव के सहित मारा गया कम्पित दिशाएँ हो उठीं जयघोष से अवधेश ...

    महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।)
    by Manish Kumar Singh

    कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत ...

    कविताएं
    by किशनलाल शर्मा

    दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके   बिनारहा नही जाातासुबह    उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार  वाले के  इन्तजार मेजब तक   अखबार नही आतामन  बेचैन ...

    कुछ पंक्ति
    by Narendra Rajput

    "पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे ...

    सीता: एक नारी - 1
    by Pratap Narayan Singh

    सीता: एक नारी ॥ प्रथम सर्ग ॥ गाथा पुरानी है बहुत, सब लोग इसको जानते वाल्मीकि ऋषि की लेखनी के तेज को सब मानते है विदित सबको राम सिय का चरित-रामायण कथा ...

    फितरत इंसान की
    by Ajay Amitabh Suman

    मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने ...

    प्रेमपूर्ण रचनाए दिलवाली कुड़ी की कलम से - 1
    by Dilwali Kudi

               मेरी गुजराती रचनाओं को आप सबने मिलकर बहोत प्यार दिया है और बहोत सराहा है। उम्मीद है कि मेरी हिंदी कवितायें भी आपको पसंद ...

    सफर....
    by Krunalmore

    हा, वक्त्त की जरुरत हैसफ़र ये ख़ूबसूरत हैहा, वक्त्त की जरुरत हैसंभल गया मे रूठ केखडा हुआ भी टूट केमर गया जो डर गयासफ़ल हुआ जो कर गयाअंजाने मोड ...

    वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप।(भाग-(४)
    by Manish Kumar Singh

    जब दिनकर नभ में आते हैं,तम का प्रभाव तब मिटता है।या दिख जाये जब केहरि तो, भेड़ों का दल कब टिकता है।।जग में प्रताप ने जन्म लिया, मुगलों का ...

    मेरे लफ्ज़ मेरी कहानी - 4
    by Monika kakodia

    मैं एक लेखिका हूँ इस नाते ये मेरा दायित्व है कि लोगों की सोच पर पड़ी हुई गर्द को अपने अल्फ़ाज़ से साफ कर दूँ , हो सकता है ...

    कुछ दूर तलक
    by Niyati Kapadia

    कुछ दूर तलक आज यूं ही निकल पड़ी थीथोड़ी देर बाद में रुकीपिंछे मुड़कर देखा तो,वहां कोई नहीं था।कोई भी नहीं।कहा चले गए वो सब लोग?जिन्हे में जानती थीयहां ...

    DOMESTIC VIOLENCE ya RAPE
    by Akash Saxena

    कोशिश कर रहा था कहानी लिखने की पर लिख न सका तो कविता का रूप दे दिया,पहले पढ़िए फिर आगे बढ़ते हैं।पढ़ने से पहले कहना चाहूंगा कि इस कविता ...

    कविता एक नए अंदाज़ में
    by Writer Dhaval Raval

    बेस्ट मोटीवेशन  लेख अभी  पढ़े और सबको पढ़ाए भी और हा ऐसे लेख कविता पढ़ने के लिए आज ही हमें मातृभारती पर फॉलो करें टिक टोकमे भी फॉलो करे ...

    वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप। (भाग-(३)
    by Manish Kumar Singh

    चित्तौड़ दुर्ग जीता अकबर, राणा के चक्षु हुये थे सुर्ख।उदयसिंह के हाथों फिसला,धोखे से रणथंभौर दुर्ग।।सुरजन ने पीठ छुरा भोंका, गढ़ सौंपा जाकर अकबर को।तलवार नहीं पकड़ी उसने, लड़ने ...

    माँ सी मासी।
    by Minal Vegad

                  तु जब आया इस जहाँ मे तब,               ए सुनके खुशी के आसुुं आए थे उनके।     ...