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    मेरी कविता संग्रह भाग 1
    by Prahlad Pk Verma

    ??????????????           अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे  उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ...

    उन्हें सूर्य के संघर्षों का कोई क्या महत्व समझाएं
    by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

     केबीएल पांडे के गीत संधि पत्र  अंधकार के साथ जिन्होंने संधि पत्र लिखिए खुशी से उन्हें सूर्य के संघर्षों का कोई क्या महत्व समझाएं मेले संदर्भों पर जीवित यह ...

    विज्ञापन की महिला
    by padma sharma

    विज्ञापन की महिला    चेहरे पर खुशी आँखों में उत्साह मेकअप की कई पर्तों में ढँकी सजी-सँवरी बाहर से हँसती हुई अन्दर से गमगीन पर खिली हुई दीखती हैं   ...

    सारांश
    by Bhumika

       आप सबने मेरे पहले ग़ज़ल संग्रह "प्रयास" को प्रेमसे पढ़ा इस के लिए आप सबका तहे दिल से शुक्रिया।   "सारांश" ये गज़लें सारांश है मेरे जीवन के कुछ ...

    मे और मेरे अह्सास - 18
    by Darshita Babubhai Shah

    मे और मेरे अह्सास 18 छोड़कर जाने वालो का इन्तजार नहीं करते हैं l  सच्ची मुहब्बत करने वाले कभी नहीं जाते हैं ll ********************************************************* कही कोई करता होगा मेरा ...

    खाली मन
    by my star kid

    "जिंदगी रंगीन होनी चाहिए,ब्लैक एंड व्हाइट तो टीवी भी होते हैं।जिंदगी खुशनुमा होनी चाहिए,गमगीन तो मातम हुआ करते हैं।आज कल घरों में डाइनिंग टेबल तो है,लेकिन साथ में खाना ...

    पीढ़ी की पीड़ा बादामी
    by padma sharma

      मुझे हतप्रभ छोड बादामी तो एक झटके से बाहर निकल गई लेकिन मैं उसके शब्दों के अर्थ खोजने लगी थी। उसकी बातें दुगने बेग से मेरे विचारों पर ...

    स्त्री सशक्तिकरण
    by padma sharma

    कहानी मॉल   रह-रहकर बच्चे का चेहरा उसकी आँखों के सामने आ रहा था। कैसे वह दुपट्टे को पकड़कर उससे रुकने का आग्रह कर रहा था। उम्र ही क्या ...

    सिर्फ तुम.. - 4
    by Sarita Sharma

    सिर्फ तुम-4खत्म हो जाते हैं कुछ रिस्ते यूँही,बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी,और साथ में खत्म हो जाती है ज़िन्दगी,जो जी रही होती है हममें..और रह जाती है, एक उदासी ...

    मे और मेरे अह्सास - 17
    by Darshita Babubhai Shah

    मे और मेरे अह्सास 17 चुप चुप से महफ़िल में बेठे है वो lजाम पे जाम पिया है, चुप है वो ll ************************************************ सब कुछ सह लेगे हम lतेरी ...

    बेनाम शायरी - 5
    by Er Bhargav Joshi

                        बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??हम चांद को पाने की हिमाकत लिए बैठे है।हम धरती पर रहकर आसमान ...

    दुर्गेश जी का काव्य संग्रह
    by Durgesh Tiwari

             (गाथा बुढ़िया माई का)चली आ रही बारात एक ओर,जिसमें लोगो की भीड़ जोड़ एक ओर।नाच रहा जोकर जोड़-२ एक ओर,थोड़ी देर में मची शोर जोड़ ...

    आत्मव्यक्ति - काव्य संग्रह
    by Abhaya Sinha

                             फुटानी बाबुजी के दलानी में का उ फुटानी रहे बाबुजी के दलानी में,भर हीक खाई के, फटफटिया घुमाई ...

    संवाद, दिल से
    by Neha

     मेरी कुछ इस तरह से हुई वार्तालाप मेरे दिल से । कि दिल भी हार गया समझाते समझाते । हुई कुछ दलीले इस तरह की ।        ...

    From Bottom Of Heart - 10
    by Jiya Vora

    1.मेरे विचार आज बह रहे है इस कलम से,   और जाकर ठहरे हैं इन पन्नों पे | इस पंक्तियों के बीच दबे हैं कहीं अल्फाज,  जिनमे मैंने छुपाकर भी खोल दिए ...

    ख़ामोश आवाजें...
    by Satyendra prajapati

    __१__हक भी अदा किया है.... जिस्म से मानो जान को जुदा किया है। इक बाप ने अपनी बेटी को विदा किया है।। सब मांगते हैं यहां हक अपना-अपना मगर। आज इक ...

    सधे हुये आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...!
    by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

     केबीएल पांडे के गीत नवगीत-                   सधे हुये  आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...! जाने कब से सोच रहा हूँ मै भी कोई गीत लिखू ! खुशियों  में खोये सोये अपने हिंदुस्तान पर!! ...

    मे और मेरे अह्सास - 16
    by Darshita Babubhai Shah

    मे और मेरे अह्सास भाग -16 आधीसे ज्यादा जिंदगी सीखनेमे निकल जाती है lआधी से जिंदगी क्या सीखा समझने मे जाती हैं ll ******************************************************* वक़्त का ही खेल है ...

    बेनाम शायरी - 4
    by Er Bhargav Joshi

                                बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ?? ??अपने वजूद को यूं बचाए रखकर समर नहीं ...

    बेनाम शायरी - 3
    by Er Bhargav Joshi

                         बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??ये शराब तो बस नाम से बदनामी झेल रही है।असल में नशा तो ...

    प्यार हो गया
    by किशनलाल शर्मा

    काश------/////----तुमब्रह्मा की अनुपम कृति हो,लगता है,सृष्टि के निर्माता ने,तुम्हे,फुर्सत में,बड़े जतन से घड़ा है,तभी तो,तुम्हारा हर अंग,प्रत्यंगबोलता है,तुम्हारी झील सी गहरी,आंखेगुलाब की पंखड़ियों सदृशपतले,रसीले,नाज़ुक होठ  औऱहवा में लहराती रेेेशमी ...

    From Bottom Of Heart - 8
    by Jiya Vora

    1.माँ !याद है मुझे, जब बचपन मै मैं  गलतियां करती थी, तब तु मेरी शरारतो को माफ कर, मुझे प्यार से समजाती भी थी|पर आज जब भूल होने पर दुनिया डाटती हैं, तब ...

    शब्दांश (मेरा काव्य संग्रह )
    by Arjuna Bunty

    पहला संस्करण: 2020   इस पुस्तक का कोई भी भाग लेखक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुन: प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है ! कवर ...

    दिल ऐ नूर
    by મોહનભાઈ આનંદ

    ========दिल ए नूर, टपकता है टपक टपक,मन कहीं चमकता है, चमक चमक;आइना ए दिल। , रोशन चांद सूरज,रुह ए दिल जिंदगी है ,लपक झपक;====================

    मे और मेरे अह्सास - 15
    by Darshita Babubhai Shah

    मे और मेरे अह्सास भाग 15 दुनिया की जंजीर तोड़कर आजा lप्यार के बंधन मे बंधकर आजा ll ********************************************************************* फोन पे बाते करना अच्छा लगाता है lपर नज़रे तुझे ...

    From Bottom Of Heart - 7
    by Jiya Vora

    1.Not everytime It is her attitude, If she is ignoring you.But Sometimes, It is her SELF RESPECT!2.दिल क्या चाहता है! जब सारी उम्मीदें टूट जाती  हैं, जब सारी कोशिशें नाकाम हो ...

    ये मेरा और तुम्हारा संवाद है #कृष्ण – 2
    by Meenakshi Dikshit

      1.       तुम्हारे स्वर का सम्मोहन तुम्हारे अनुराग की तरह, तुम्हारे स्वर का सम्मोहन भी अद्भुत  है, अपनत्व की सघनतम कोमलता, और सत्य की अकम्पित दृढ़ता का ये संयोग ...

    सिर्फ तुम.. - 3
    by Sarita Sharma

    सिर्फ तुम-3दर्द जब हद से बढ़ जाता है,चीखना चाहते है..चिल्लाना चाहते है.  मन में जमी धूल एक पल में निकालना चाहते है...चाहते हैं कह दें सब हाल-ए-दिल,पर कुछ कह नहीं ...

    मानवता के डगर पे
    by Shivraj Anand

    प्यारे  तुम मुझे भी अपना लो ।गुमराह हूं  कोई राह बता दो।युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।वहां बडे सतवादी है।सत्य -अहिंसाकेपुजारी ...

    जय हो बकरी माई
    by Ajay Amitabh Suman

    (१)   जय हो बकरी माई   बकरी को प्रतीक बनाकर मानव के छद्म व्यक्तित्व और बाह्यआडम्बर को परिभाषित करती हुई एक हास्य व्ययांगात्म्क कविता।   सच कहता हूँ ...