Poems Books in Hindi language read and download PDF for free

    क्या है जिंदगी - 2
    by Rohit Shabd
    • 40

    क्या है जिंदगी? (2) 55 जिंदगी क्या है ? जिंदगी बस यु ही खत्म ना हो जाये हमेसा एक डर लगता उस डर से आगे निकल कुछ कर जाए ...

    लोक डाउन कविताएं
    by અમી વ્યાસ
    • 166

    बंद हे दुकानें, बंद हे दफ्तरेंरोज की चहल पहल ने आज हो गई है परेपंछी उड़ रहे खुले आकाश में और जिंदगियां बंद हे चार दीवारों मेंसब लगे हे मौत ...

    क्या है जिंदगी - 1
    by Rohit Shabd
    • 148

    क्या है जिंदगी? (1) मुश्किले आसान होती अगर तेरा नाम जिंदगी होता जिंदगी क्या हैै ? बस ये जानने की एक कोशिश है समझने की एक इच्छा है उस ...

    मे और मेरे अह्सास - 6
    by Darshita Babubhai Shah
    • 192

    मे और मेरे अह्सास भाग- ६ किताबों ने मीटिंग रखीं है lगूगल की छुट्टी करने को ll ----------- निगाहों से बयान होता है वो है इश्क lइशारों से बयान ...

    शायरी - 6
    by pradeep Tripathi
    • 234

    अब तक मेरा इश्क बहुत छोटा था अब बड़ा होने जा रहा है।पहले वो आशिक था अब बेवफ़ा होने जा रहा है।।वो आइने के पीछे से हर चेहरा पहचानता ...

    मैं आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँ
    by अमरदीप कुमार
    • 112

    मैं एक आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँमेरे पिता के पास दो बीघा समतल औरतीन बीघा उबड़-खाबड़ ज़मीन हैइनमें से कुछ चौरहा तो कुछ बटइआ की शर्तों ...

    ओ वसंत भाग-१
    by महेश रौतेला
    • 188

    ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में बदलने ...

    मे और मेरे अह्सास - 5
    by Darshita Babubhai Shah
    • 300

    मे और मेरे अह्सास (5) आप हम से नजर को मिला लीजिये lजाम नजरो से हमको पीला दीजिये ll कोई काटा चुभने ना पाए पांव मे lफूल ही फूल ...

    चल उड़ जा रे उड़ जा पँछी ऊंचे गगन में
    by Dev Borana
    • 210

    चल उड़ जा रे उड़ जा पंछी ऊंचे गगन की ओरतुझे परिवार सवारना है तुझे घर बसाना है ,चल उड़ जा गगन की ओर दो तिनको की होड़ में तुझे ...

    सिर्फ तुम..
    by Sarita Sharma
    • (15)
    • 622

    सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ...

    ग़ज़ल, शेर - 4
    by Kota Rajdeep
    • 192

    अब मुसलसल यादों में आता ही नहींलगता है मुझसे बेवफ़ाई मोड़ ली है।___Rajdeep Kotaरोना धो ना सब सहना सीख गएहम इश्क़ करना किसिसे सीख गए। मेरे दिल ए नाकाम तुम ...

    किताब
    by DHRUVIN P_ATEL
    • 236

    दुनिया सिर्फ कहती नही जनाब ,वो अक्सर कहती रहती है यहाँ लकड़े कहाँ ;सिर्फ़ लड़कियाँ ही तो सहती रहती है ...हम तुमसे अनजान थे अब तो वो समा ही बेहतर लगता ...

    मे और मेरे अह्सास - 4
    by Darshita Babubhai Shah
    • 332

    मे और मेरे अह्सास (4) सफर मे चल पड़े है lयकी है हमे पहचानमिल ही जाएगी ll *** गर तू वादा करता है lकि तू ताउम्र खुश रहेगा lतेरे ...

    शहर सी जिंदगी यू ही भागने में निकलती थी
    by Dev Borana
    • 196

    सपनों में सोया था एक नए सवेरे के लिएसपने भी आये थे अपने लिए सुबह उठना भी था क्योंकि नॉकरी पर जाना थायोग भी करना था क्योंकि स्वास्थ्य की चिंता ...

    ग़ज़ल, शेर - 3
    by Kota Rajdeep
    • 170

    मिले तो होगी फ़िर वोही बात जुदाई किइससे अच्छा हैं ये दिन ऐसे ही बसर होने दें।___Rajdeep Kotaदेर तक रात में करवटें बदलना याद हैंहमें अब तक वो वाकियात ...

    ग़ज़ल, शेर - २
    by Kota Rajdeep
    • 268

    अब वोही पुराने ज़ख्म ताजियाना क्यों करें।इश्क़ के दरख़्त पे नया आशियाना क्यों करें।___Rajdeep Kotaजब ये लालिमा कालिमा मैं तब्दील हो जाएं।ऐसा न हो की फ़िर मिलना मुश्किल हो ...

    गलती तो ये थी कि तुमसे दिल लगाया था....।
    by Akshay jain
    • 276

    सोच रहा था कि, दिल लगाकर कोई गलती तो नहीं की मैने,मगर गलती तो ये थी, कि मैंने तुमसे दिल लगाया था।।??दिल तो मैने दिल से ही लगाया था, ...

    मौलिक शेर - 3
    by Deepak Bundela AryMoulik
    • 287

    ये बिछड़ना भी किस काम का रहा ना हम काम के रहे ना तुम काम के रहे... !------------जब से वो अनजान क्या हुए हम तो बेजान से हो गये... !--------------चलो ये ...

    तृष्णा
    by Er Bhargav Joshi બેનામ
    • (25)
    • 470

    मेरे हर वजूद को उसने बेरहमी से तोड़ा है,ताउम्र जिसको मैंने बड़े ही प्यार से जोड़ा है।******* ****** ******* ******** *******इश्क हो रहा है उनसे  क्या किया जाए ???रोकें ...

    कलम नहीं तलवार चुनूँ मैं - मेरी चार कविता
    by Bhupendra Dongriyal
    • 250

            (1)"तुम मेरे प्यारे हो" ????? सच कहूँ तो न हम तुम्हारे हैं, न तुम हमारे हो । सब कहते जरूरत को देखकर, दुनिया में तुम ...

    ग़ज़ल, शेर
    by Kota Rajdeep
    • 410

    न था इंतज़ार कीसुका फ़िर भी उम्र भर इंतज़ार में रहें

    फिर सुनना मुझे
    by Dr Narendra Shukl
    • 381

    अमन बिक रहे हैं अमन बिक रहे हैं , चमन बिक रहे हैं । लाशों से लेकर कपन बिक रहे हैं ।। म्ंत्रियों को देखा है खुले आम बिकते ...

    मे और मेरे अह्सास - 3
    by Darshita Babubhai Shah
    • (11)
    • 363

    मे और मेरे अह्सास (3) अकेले है फिर भी व्यस्त्त रहते हैं lअपने आप मे ही मस्त रहते हैं ll ***** दिल्लगी कर ने आया है वो lजिंदगी मेरी ...

    धुँधली तस्वीरें
    by Vinay Tiwari
    • 306

    1)ऐसा ज़रूरी नहीं, राह का हर व्यक्ति हँस कर मिलें, कोई गले मिलकर, थोड़ा सा रो दें, और कुछ न कहें। यहाँ पर वो ख़ुशियाँ हर वक़्त क़िस्मत में ...

    ख़ामोश प्यार।
    by Nimisha
    • (18)
    • 410

    लो समय आ गया बिछड़ने काकर न सके हम कुछ अपनी बात।गई शाम आ गया प्रभात फैली अरूणिम आभा चहुं ओर।    स्वर्णमय हो गया संसारऐसे सुंंदर  अवसर परलो समय ...

    ओस की बूंदें - मुक्तक संग्रह
    by Amrita shukla
    • 309

    फूल खिला है उस महक से जान लेते हैं।कदमों की आहट से कहाँ अन्जान रहते हैं।जबसे तेरा अक्स दिल में उतर आया है ,आंखें बंद हो तो भी तुम्हें ...

    उस बुजुर्ग की दीवाली
    by Tarkeshwer Kumar
    • 291

    जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई हैं मृत्यु, पर उससे भी कटु सत्य हैं वृद्धावस्था। एक कविता के माध्यम से मैंने बुज़ुर्गों के प्रति अपने कर्तव्यों को और इस अवस्था ...

    में और मेरे अहसास - 2
    by Darshita Babubhai Shah
    • 290

    में और मेरे अहसास भाग २ खुद को खुद की कबर मे देखता हूं lफिर मे तेरी नजर में देखता हूं ll *** एक लम्हा तो गुजरता नहीं lलोग ...

    ख़ामोश लफ्ज़
    by Er Bhargav Joshi બેનામ
    • (48)
    • 544

    हादसों से ही हमारी पहचान बनती है,बिना दर्द के छवि कहां आसान बनती है।******* ****** ******* ****** *******उछलता है कोई घाव मुझ में लहर बनकर,पता तो करो किसने दिया ...

    बेबस आंखें
    by Dr Narendra Shukl
    • 217

      बेबस आंखें सब कुछ , देखती हैं आंखें - प्रियतम का इंतज़ार करती प्रेमिका को मीनार शिखर पर बांग देते हये पवित्र मौलवी को भीख मांगते , मासूम ...