पारस चुपचाप बैठा रहा।प्रणाली के रोने की आवाज़ धीरे धीरे शांत हो रही थी।कितनी देर बाद —उसने अपना सिर उठाया।आँखें पोंछीं।और बोली —"भैया... वो बस एक साधारण इंसान है।"पारस ने उसे देखा।"उसका नाम वर्धान है।"पारस की आँखों में कुछ हिला — पर वो चुप रहा। सुनता रहा।प्रणाली ने सब बताया —जंगल में पहली मुलाकात। वो झोपड़ी। वो बाबा। वो नदी किनारे की बातें। वो हँसी। वो झगड़े।और फिर — वो आखिरी लम्हा।"जाओ।"पारस देर तक चुप रहा।गरुड़ लोक और बीजापुर की पुरानी कहानी उसे पहले से पता थी।और अब —एक एक बात जुड़ रही थी।उसने धीरे से पूछा —"जिस दिन मेरे