बारिश, किताबें और तुम

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शाम का वक़्त था। आसमान में हल्की-हल्की बदली छाई हुई थी और हवा में एक अजीब-सी ठंडक घुली थी। शहर के उस छोटे-से कोने में, जहाँ लोग भागते-दौड़ते कम और ठहरकर जीते ज़्यादा थे, वहीं एक पुरानी-सी लाइब्रेरी थी — “सफर-ए-अल्फ़ाज़”।अनाया उस लाइब्रेरी की सबसे शांत और सबसे खूबसूरत रूह थी। किताबों के बीच रहने वाली, हर कहानी को अपने दिल में उतार लेने वाली, और हर शब्द को महसूस करने वाली।वो अक्सर कहती थी —“कुछ लोग शोर में सुकून ढूंढते हैं,और मैं... खामोशी में तुम्हें।”उस दिन भी वो लाइब्रेरी के कोने में बैठी एक किताब पढ़ रही थी, तभी