अधूरी मोहब्बत - अध्याय 10 (अंतिम अध्याय)

  • 681
  • 222

अधूरी मोहब्बत — अंतिम अध्याय: नई सुबह राधा के सवाल ने अर्जुन को सोच में डाल दिया था। क्या वाकई किसी की मौत के साये में अपनी खुशियाँ ढूँढना गलत था? उस रात अर्जुन सो नहीं पाया। उसने समीर की डायरी के उन आखिरी पन्नों को बार-बार पढ़ा।समीर ने लिखा था— "राधा, अगर तुम अर्जुन के पास जाने में हिचकिचाओगी, तो मेरी रूह को शांति नहीं मिलेगी। मेरी खुशी तुम्हें खुश देखने में थी, तुम्हें ताउम्र विधवा के लिबास में तड़पते देखने में नहीं।"कुछ महीने बीत गए। अर्जुन ने राधा पर कोई दबाव नहीं डाला। उसने राधा को वक्त दिया