शरीक़-ए- ज़िंदगी

कॉलेज रियूनियन की पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी। पुरानी यादों की महक के बीच घुलने सब आये थे...वाणी भी आई थी...आखिर पुराने दोस्तों से मिलने की बात ही कुछ और होती है। कुछ ही देर बाद उसकी नज़र चुड़ैल तिकड़ी पर पड़ गई जो कॉलेज के दिनों में उसकी सहेलियाँ होने का झूठा दावा करतीं थीं पर हकीकत यह थी कि वो तीनों वाणी से बेतरह जलतीं थीं और हर वक़्त उसे नीचा दिखाने के फिराक में रहतीं थीं। क्योंकि  वाणी जैसी लड़की के व्यक्तित्व में दोष ढूंढ़ना उनके बूते के बाहर था - रूप... गुण... बुद्धि... हृदय...व्यवहार हर