मुंबई की वह पहली रात किसी ठंडे कफन जैसी थी. शांति निवास' नाम की उस जर्जर और पुरानी इमारत के कमरा नंबर तीन सौ दो में कदम रखते ही मुझे अहसास हो गया था कि यहाँ कुछ तो बहुत बडा और भयानक गलत है. कमरे के हर कोने में मकडी के जाले इस तरह फैले थे जैसे वे सालों से किसी शिकार का इंतजार कर रहे हों. दीवारों से झडती पपडी और सीलन की बदबू जैसे कोई दफन हो चुकी पुरानी दास्तां सुना रहे थे. बाहर मुंबई की भारी और गरजती हुई बारिश शुरू हो चुकी थी—वही बारिश जो टीवी