पीपल के पेड़ वाली सवारी

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एक बार हाथरस के पास सलेमपुर में हमारा घर था। एक बार हमारे पति देव रोज रात को रामलीला में act करने जाते थे। और दोपहर तक घर आ जाते थे। उस समय bike की व्यवस्था नहीं थी। तो साइकिल से जाते थे। वो राम जी का act करते थे। वो रोज घर आते थे। फिर घर में खेती देखते।     एक दिन सुबह आने में late हो गए। उन्हें सिलमपुर से छौंक गांव आना था। दोपहर हो गई। दोपहर की बात थी। तो साइकिल चल रही थी। और धूप बहुत तेज थी। खेतों का रास्ता था।     वहां एक