पन्नों से परे का प्रहारभाग एक: कागज की सरसराहट और अदृश्य उंगलियांअस्पताल के उस कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि मुझे अपनी पलकों के झपकने की आवाज भी किसी धमाके जैसी लग रही थी. मेज पर पडा वह तांबे का लॉकेट. जिस पर' आपका' (पाठक का) नाम खुदा था, वह धीरे- धीरे गर्म होने लगा था.मैने नर्स को पुकारने के लिए हाथ बढाया, लेकिन मेरा हाथ हवा में ही जम गया. नर्स, जो अभी कुछ पल पहले मुस्कुराकर बाहर गई थी, वह गलियारे में एकदम स्थिर खडी थी. जैसे किसी ने' पॉज' (Pause) का बटन दबा दिया हो.तभी मुझे