मंजिले - भाग 49

  • 249
  • 69

परिक्रमा की ही साथ चलती पटरी की तरा है, एक से गाड़ी उतरी दूसरे पड़ चढ़ जाये, तो कहा पहुचे पता ही नहीं.... रास्ते पे --------------परीक्षा 49  वी कहानी है। ये कहानी का तीसरा खंड है। शाम से पहले पहले ही वो इतने खुश वो व्यक्ति थे पूछो मत। बाके जी का प्रशाद बनवारी के लिए धोती कुड़ता नया ला कर उनके हाथ मे थमा दिया था..... बनवारी हकबका सा देख रहा था " यजमानो कया है ये। " तभी उनमे से एक बोला " पंडित जी हम सुबह वाले चोर आपके पास अरदास लगाने नहीं आये थे, हम जीत गए, पता