Best Motivational Stories stories in hindi read and download free PDF

सुबह के चार बजे
by Krishna Timbadiya
  • 122

में हमेशा से लिखना और पढ़ने पसंद करती हूं। मेरे पढने के अनुभवों के बाद मेंने लिखना शुरू किया। कुछ कहानियों को मैंने अपने निजी ज़िंदगी से जोड़ के ...

कलाकार
by Rajesh Maheshwari
  • 166

कलाकार     मोहनसिंह बचपन से ही कलात्मक अभिरूचि का था और दूसरों की नकल करना उसका प्रमुख खेल था। जब वह पाठशाला जाने लगा तो उसके शिक्षकों ने ...

पीड़ा
by Arjuna Bunty
  • (13)
  • 467

पीड़ा          जिस तरह खुशी जीवन की एक सच्चाई है जन्म और मृत्यु जो चिरंतन सत्य है । उसी प्रकार दुख , कलह,तकलीफ, पीड़ा भी जीवन की सच्चाई है। ...

आत्मा की आवाज(भाग 1)
by किशनलाल शर्मा
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गणेश को बचपन से ही चोरी की आदत पड़ गई थी।बड़ा होकर वह शातिर चोर बन गया।छोटा था तो छोटी चोरी करता था।बड़ा हुआ तो बड़ी चोरी करने लगा।रात ...

एक कबूतरी का मदर्स डे
by Archana Anupriya
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           "एक कबूतरी का मदर्स डे"आसमान में काले बादल उमड़ घुमड़ रहे थे। तेज हवाएँ एक अजीब सी आवाज के साथ आँधी का रूप ले चुकी थीं। अपार्टमेंट के ...

दो किलो आम का मूल्य
by Kalyan Singh
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जैसा कि  गर्मी का मौसम था तो दिनेश ड्राइवर ने पहले से ही कार का A .C  चालू रखा था। वो मेरे व्यवहार से पूरी तरह वाकिफ़ था कि ...

गाली
by सिद्धार्थ शुक्ला
  • 313

#गाली हर मां बाप अपने बच्चों को बहुत संभाल कर रखते हैं कि बचपन में लड़कपन में वे कोई बुरी संगत में न पड़ जाएं । खूब ख्याल रखते है ...

बात न करो जात की - 1
by Maya
  • (20)
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कई वर्षों से न जाने कितना कुछ पढ़ी थी!लेकिन उसमें ज्यादातर राजा रानी के किस्से थे,पढ़ने में वह बहुत अच्छे लगते थे,मगर लिखना मैं कुछ और चाहती थी!उस तरह ...

माँ
by Rajesh Maheshwari
  • 324

माँ           श्यामा सुबह-सुबह नहा-धोकर एक लोटे में जल और डलिया में फूल लेकर मन्दिर चली जा रही थी। यह उसकी प्रतिदिन की दिनचर्या थी। अचानक उसे ...

उजाले की ओर
by Pranava Bharti
  • (11)
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1-उजाले की ओर   ----------------- मित्रों ! प्रणाम  जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता ...

सब्र 
by Arjuna Bunty
  • 808

  सब्र पहले बुजुर्गों से सुना था जिंदगी इम्तिहान लेती है, तब लगता था कि  लोग भी क्या क्या बोलते हैं, भला जिंदगी भी कहीं  इम्तिहान लेती है । अल्हड़पन ...

हनुमानजी से साक्षात्कार
by Atul Kumar Sharma ” Kumar ”
  • 350

सोमवार खत्म होने को था,अतुल के चेहरे पर अगले दिन को लेकर एक बार फिर से चिंता की लकीरे उभर आई।। "मंगलवार" इस दिन को लेकर अतुल बहुत भयभीत ...

प्रिय एंजल
by तेज साहू
  • 269

प्रिय एंजल,खाने- पीने की खूब शौकीन हो, तुम सुबह उठने के बाद से रात सोने के पहले तक कुछ न कुछ खाते रहना बहुत पसंद है, तुमकोशाम को "टिल्लू ...

J K Rowling
by Wr.MESSI
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  • 1.1k

ये कहानी है एक लड़की की....जिसे लिखने का बहुत शौक़ था... 6 साल की  उम्र में उसने एक खरगोस के उपर कहानी लिखी थी जिसे Pox की बीमारी थी। उसने ...

धरती का स्वर्ग।
by Minal Vegad
  • (15)
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            "माँ तुम मेरा रिपोर्ट कार्ड देखो मैंने बहुत अच्छे नंबर पाए हैं।" कीशन अपना परिणाम बड़ी खुशी से अपनी माँ को दिखाते बोला।   ...

मोबाइल की जान और शान
by r k lal
  • (18)
  • 910

मोबाइल की जान और शान आर 0 के 0 लाल                     सौरभ की शादी एक साल पहले हुयी थी । उसकी पत्नी रोज सुबह रोमांटिक तरीके से उसे ...

वे बहत्तर घण्टे
by Rajesh Maheshwari
  • 315

                                           वे बहत्तर घण्टे   गुजरात भीषण अकाल से पीड़ित था। रहे थे। फसलें सूख चुकी थीं। खेत दरक गये थे। इन्सानों के लिये अनाज की व्यवस्थाएं तो सरकार ...

मैं टूटकर नहीं बिखरूंगा
by Saroj Prajapati
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रात को धड़ाम की आवाज से सुषमा की आंख खुली। उसनेे लाइट जला कर देखा तो उसके पति तो वहीं सो रहे थे लेकिन बेटा वहां नहीं था। रात ...

किसान
by Rajesh Kumar
  • 385

हमारे देश कृषिप्रधान देश है, लगभग 60% समाज कृषि पर जीवनयापन करता है। कहते है 17वीं शताब्दी तक भारत की कृषि व्यवस्था बहुत दुरूस्त थी जिससे किसान स्वावलंबी थे ...

जिंदगी
by shama parveen
  • (13)
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जिंदगी ईश्वर का अनमोल तोहफा है. जिसे हर किसी को अच्छे से जीना चाहिए. किसी भी इंसान की जिंदगी बहुमूल्य होती है. हर इंसान को अपनी जिंदगी का मूल्य ...

प्रयत्न
by Arjuna Bunty
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  • 1.1k

जिंदगी वहां से शुरू करने में ज्यादा मज़ा है जहां पर लगे की अब मुझसे जिंदगी नहीं जी जा सकती है। क्योंकि, यही वो मौका होता है , जब ...

स्वाधीन वल्लभा
by Geeta Shri
  • 569

स्वाधीन वल्लभा गीताश्री प्रेम के आस्वाद के लिये शब्दों की भला क्या जरूरत? शायद दुनिया की तमाम भाषायें, प्रेम के किसी हिमनद से निकली होंगी। एक दुभाषिये के तौर ...

जीवन सलामती के तीन पहेलु
by Sunil Bambhaniya
  • 289

                         कोरोना वायरस महामारी अपने भारत देश में ही नहीं किन्तु पूरी दुनिया में फैली हुई है। दिन ...

गुरु
by Pranava Bharti
  • 574

गुरु  ------    भोर की सुनहरी रूपाली किरणें अनु के मन में एक नया संदेश प्रसरित करती हैं।बड़ा भला लगता है उसे ब्रह्म मुहूर्त के सूरज से कानाफूसी करना ...

एक गलत कदम
by VANDANA SINGH
  • (13)
  • 817

अगर उस दिन ममता को रोक लिया गया होता तो उसके घर से पुलिस स्टेशन तक जाना एक गलत कदम साबित ना होता। कहते है सादी ब्याह की जोडिया ...

ध्वनि
by Sarika Saxena
  • 595

तरंग हॉस्पिटल के वेटिंग एरिया की एक चेयर पर बैठी हुई थी| उसका हाथ अपने उभरे हुए पेट को प्यार से सहला रहा था, और उसका दूसरा हाथ अपने ...

घृणा का फल
by Saurabh
  • (11)
  • 958

भारत के एक ग्राम में एक परिवार रहता था, छोटा परिवार था जिसमें एक बेटा और उसके मां और पापा रहते थे।उनका अपना तो कोइ घर नहीं था लेकिन ...

अनजान देवदूत
by pratibha singh
  • 486

                      रहस्मयी सेंटामैं मरना चाहती हूँ। कुछ भी तो नही बचा जीने के लिए।गरीबी में पैदा हुई। माँ बाप बेहद गरीब थे। मैं उनकी इकलौती सन्तान थी। घर की हालत ...

हर मुश्किलों का अंत
by Karan Somani
  • 581

कैसे है? आप सब, चलो ये बात तो बहुत अच्छी है की आप अच्छे है, अपनी ज़िन्दगी को जी रहे है या काट रहे है ये हमारी सोच है ...

पढ़ाई
by VANDANA SINGH
  • 493

ये माना जाता है की पढने का हुनर सबमे नही आता , ये तो कुछ लोगो में ही होता है । ऐसे हुनर से कौन नही निखरेगा , कौन ...