Best Motivational Stories stories in hindi read and download free PDF

आधार - 24 - भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 87

भगवत कृपा, जीवन की दिव्य शक्ति है।कभी आप रास्ते में पड़े पत्थर से टकराकर लड़खड़ाते हैं फिर संभल जाते हैं और चोट खाने से बच जाते हैं। कभी आपके नजदीक ...

पुस्तकों की दुनिया
by Anand M Mishra
  • 204

पुस्तकों का संसार! आज के डिजिटल युग से बिल्कुल अलग! पुस्तकें इतिहास, साहित्य, विज्ञान और सभ्यता की संवाहक हैं। दुनिया में परिवर्तन के इंजन हैं।  दुनिया को देखने की ...

बिनु पानी सब सून
by श्रुत कीर्ति अग्रवाल
  • 348

प्रिय दीदीचौंक गई न? तुमने तो कभी सोंचा तक नहीं होगा कि मैं तुम्हें पत्र लिखूँगी। पर एक बात शायद भूल गई तुम, या शायद जान-बूझ कर भुला दिया ...

हिंदुस्तान की कथा
by Anand Tripathi
  • 405

एक ऐसा देश जिसकी चाहत समस्त पृथ्वी के धुरंधर ने की। शायद इस पर उनका ही राज हो जाए। लेकिन हिंदुस्तान में वही लोग राज किए। जिनको हिंदुस्तान ने ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 306

उजाले की ओर ---संस्मरण  -------------------------   स्नेही मित्रो !   सस्नेह नमस्कार       बेतरतीब सी ज़िंदगी को तरतीब में लाने के लिए न जाने कितने -कितने पापड़ बेलने ...

जुनून
by Anand M Mishra
  • 519

जुनून शब्द का अर्थ कुछ लोग पागलपन से लगाते हैं। बात सही भी लगती है। जब तक किसी कार्य के प्रति पागलपन नहीं आएगा तब तक वह कार्य नहीं ...

आधार - 23 - आत्म-साक्षात्कारसफलता का प्रथम अध्याय है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 288

आत्म-साक्षात्कारसफलता का प्रथम अध्याय है।साक्षात्कार शब्द से हम सभी भलीभांति परिचित हैं। सभी ने अपने जीवन में अनेकों साक्षात्कार दिए होंगे। कई साक्षात्कारों के परिणाम स्वरुप आपको जीवन पथ ...

मैं अकेला ही काफी हूँ
by Mohit Rajak
  • 588

दोस्तों हमारे साथ अक्सर ऐसा है, होता जब हमे कोई नहीं समझता है । हमारे साथ कोई भी नहीं होता है, हमे हमारी मंजिलो तक खुद ही चलना पड़ता ...

पापा
by Keval Makvana
  • 489

                                 "गुड मॉर्निंग डैड।"  विशाल अपने पिता विराटभाई के पास गया और बोला।  विराटभाई ने कहा, ...

एक नया सफ़र रेगिस्तान की ओर
by Priyanka Patel
  • 654

नई जगह नए लोग,खामोश हूं में बोल रही खामोशियाँ।चार दीवालों से निकलकर चली जैसलमेर के रेगिस्तान में,चार दिन के इस सफर में जाने पूरा जहा जी आई में।।रेगिस्तान की ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 354

    उजाले की ओर ---संस्मरण --------------------------      मित्रों ! सस्नेह नमस्कार !     पिछली बार मैंने आप सबसे  कोलकता की उड़ान में बैठकर मेडिटेशन की बात साझा की ...

आधार - 22 - आत्म-निर्माणजीवन का प्रथम सोपान है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 366

आत्म-निर्माणजीवन का प्रथम सोपान है।संसार में उपस्थित समस्त प्राणी अपने अस्तित्व को संरक्षित करते हुए अपने विकास के मार्ग पर अग्रसर रहते हैं। बौद्धिक विश्लेषण की दुर्लभ शक्ति होने ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 633

उजाले की ओर ---संस्मरण --------------------------      वह हवाई-यात्रा बहुत अजीब थी ,अजीब क्या !कभी सोचा ही न था कि इतने ऊपर आकाश में कोई इस प्रकार की सोच या ...

त्रिजटा बोली
by Ana AT
  • 468

                         रावण के जाने का आभास होते ही सीता की आँखों से अश्रुधारा प्रवाहित होने लगी। अभी तक जिस ...

आधार - 21 - परिश्रम-शीलताउन्नति की प्रथम सीढ़ी है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 432

परिश्रम-शीलताउन्नति की प्रथम सीढ़ी है।परिश्रम का विशेष महत्व है। परिश्रम के बिना मनुष्य तो क्या पशु पक्षियों का भी जीवन संभव नहीं है। प्रकृति का प्रत्येक प्राणी निर्धारित नियम ...

थैंक यू
by Bhavna Shekhar
  • 528

आज उमा बहुत उदास है। पति के जाने के बाद दो ही सहारे थे ज़िन्दगी का सूनापन काटने के -- कॉलेज की नौकरी और नेहा। नेहा अब बारहवीं पास ...

आधार - 20 - ईमानदारी, राज शक्ति का अंश है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 444

ईमानदारी, राज शक्ति का अंश है।आज के युग में रत्नों की कीमत करोड़ों में आंकी जाती है। आधुनिक इंसान इन रत्नों को खरीदने के लिए ऊंची से ऊंची बोली लगाता ...

लक्ष्मी का वरदान
by Kamal Maheshwari
  • 828

किसी नगर में एक धनलाल नाम का सेठ था । धन के देवता कुबेर जी उनसे बहुत प्रसन्न थे। घर मे किसी भी चीज की कोई कमी नही थी। ...

भविष्य
by Nidhi Makwana
  • 930

हम सोचते है हमारे भविष्य के बारे में ओर फिर हम उस भविष्य को सच करने के लिए हम मेहनत करते है।लेकिन जब हम अपनेे करियर केे बारे में ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 741

उजाले की ओर--संस्मरण  -----------------------      कुछ बातें ऐसी कि साझा करनी  ज़रूरी लगती हैं नहीं तो कहते हैं न कि असहज हो जाता है मनुष्य ! अरे ! ...

आधार - 19 - कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 543

कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।कार्य में सफलता और जीवन में उन्नति का मूल मंत्र श्रम है। श्रम के बिना सफलता प्राप्ति की कामना पूर्णतया असंभव है। जिंदगी में आगे बढ़ने, ...

दाँ एण्ड....
by Saroj Verma
  • 819

क्या दादाजी! आप फिर से आज सिगरेट लेकर बैठ गए,तरुन ने अपने दादाजी से कहा।। इतने दिन हो गए,तुम लोगों के मना करने पर मैनें सिगरेट को हाथ नहीं ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 720

उजाले की ओर ---संस्मरण  ------------------------       कई बार बहुत से लोग बहुत सुंदर लगते हैं ,आकर्षित करते हैं ,मित्रता भी हो जाती है किन्तु कुछ दिनों बाद ...

खुशी का रिमोट
by Roop Kishore
  • 828

                    आधुनिक जीवन की स्पर्धा में हम भागते जा रहे हैं। इस भाग दौड़ में हम अपने उद्देश्य को भूल गए। ...

आधार - 18 - क्रोध, मानसिक दुर्बलता का प्रतीक है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 690

क्रोध, मानसिक दुर्बलता का प्रतीक है।जीवन में प्रत्येक व्यक्ति नित्यप्रति अनेकों व्यक्तियों से मिलता है व अनेकों परिस्थितियों का सामना करता है। ऐसे में सभी परिस्थितियां आपके अनुकूल होगी या ...

उजाले की ओर - संस्मरण
by Pranava Bharti
  • 600

उजाले की ओर—संस्मरण -------------------------- स्नेही मित्रों सस्नेह नमस्कार       हमारे ज़माने में बच्चे इतनी जल्दी बड़े नहीं हो जाते थे | आप कहेंगे ,उम्र तो अपना काम करती है ...

सच का सामना
by राज कुमार कांदु
  • 1.2k

कई दिनों से अमर की रजनी से बात नहीं हो पा रही थी । उम्र का अर्ध शतक लगाने के बाद उसकी मुुुलाकात आभासी दुनिया में एक आकर्षक महिला ...

आधार - 17 - मैत्री-भावना, व्यक्तित्व की प्यास है।
by Krishna Kant Srivastava
  • 918

मैत्री-भावना, व्यक्तित्व की प्यास है।मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जिसको सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए संबंधों की आवश्यकता होती है। दैनिक और पारिवारिक जीवन में एक व्यक्ति को अनेकों ...

आप हमारे हिस्से में नहीं
by Swati Kumari
  • 807

               आप हमारे हिस्से में नहींमैं गणेश प्रसाद उम्र लगभग 65 या 70 के आसपास होगा। घर...., छोड़िए क्या फायदा बता कर पर ...

उजाले की ओर (संस्मरण )
by Pranava Bharti
  • 906

उजाले की ओर (संस्मरण ) --------------      जीवन का एक शाश्वत सत्य ! आने वाला जाने का समय लिखवाकर ही अपने साथ इस दुनिया में अवतरित होता है | ...