Motivational Stories Books in Hindi language read and download PDF for free

    शक्तिला
    by meenakshi singh
    • 184

    आज पूरी रात ठीक से सो नहीं पाई शक्तिला, नींद आती भी कैसे ! हंसती खिलखिलाती, जीवन के उमंगों से भरपूर, वह मासूम सी लड़की कब बचपन की दहलीज ...

    कैंसर – निराशा से बचें
    by Rajesh Maheshwari
    • 56

    कैंसर – निराशा से बचें   डा. ईश्वरमुखी को मई 2018 में 85 वर्ष की अवस्था में कैंसर हो गया। जब रोग का पता लगा वह थर्ड स्टेज पर ...

    विवेक
    by Sunilkumar Shah
    • 302

    जिंदगी का वह पल जिसे हम देख चुके हैं, महसूस कर चुके हैं, हमारे मन स्मृति में हमेशा जिंदा रहता है। ऐसे ही बात मैं आपको बताना चाहता हूं।आज ...

    निर्जीव सजीव
    by Rajesh Maheshwari
    • 146

    निर्जीव सजीव      जबलपुर के पास नर्मदा किनारे बसे रामपुर नामक गाँव में एक संपन्न किसान एवं मालगुजार ठाकुर हरिसिंह रहते थे। उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों एवं ...

    समाधान
    by Rajesh Maheshwari
    • 538

                                                समाधान          रागिनी एक संभ्रांत परिवार की पढी लिखी, सुंदर एवं सुशील लडकी थी। उसका विवाह एक कुलीन परिवार के लडके राजीव के साथ संपन्न हुआ था। ...

    चेहरे पर चेहरा
    by Rajesh Maheshwari
    • 306

    चेहरे पर चेहरा   रामसिंह नाम का एक व्यक्ति था, वह पेशे से डाक्टर था। वह बहुत से लोगों को नौकरी पर रखे था। उसने यह प्रचारित किया था ...

    मृत्यु-बोध
    by Bhupendra Kumar Dave
    • 272

    मृत्यु-बोध मैं पहली बार श्मशान गया था। अन्त्येष्ठि मेरे मित्र की थी इसलिये खालीपन का कसैला स्वाद रह-रहकर मस्तिष्क अनुभव कर रहा था। मेरे इर्द-गिर्द सभी चेहरे मुझे सहमे ...

    जहाँ चाह वहाँ राह
    by Rajesh Maheshwari
    • 398

                         जहाँ चाह वहाँ राह    डा. अंजली शुक्ला (61 वर्ष) अर्थशास्त्र की प्राध्यापक है। वे दुर्भाग्य से 2014 में कैंसर से पीडित हो गई थी परंतु अपने आत्मबल, ...

    अचानक
    by Pranava Bharti
    • 344

          अचानक  --------------          उसने सीढ़ियां चढ़ते हुए एक लंबी साँस खींची थी ,पता नहीं ---शायद थक गई थी या फिर आदत पड़ गई ...

    19 साल का वो हैकर और कंप्यूटर प्रोग्रामर
    by Mrityunjay Singh
    • 392

    यूपी के चंदौली जिले के औरैया गांव में 21 साल पहले किसान योगेंद्र सिंह के घर पैदा हुए बेटे मृत्युंजय सिंह के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं ...

    जन्म या मृत्यु
    by Chaya Agarwal
    • 482

    कहानी - जन्म या मृत्युउस रात कड़ाके की ठंड थी। दूर-दूर तक कोहरा पसरा हुआ था।वाचमैन भी कंम्बल में दुबका था। एक तो ठंड की हद उस पर अमावस ...

    अकल्पित
    by श्रुत कीर्ति अग्रवाल
    • 226

    अाने को तो वह गाँव आ गये थे, पर मन बिल्कुल झल्लाया हुआ था । अक्सर वो इस बात का लेखा जोखा करते रहे हैं कि माँ बाप का ...

    प्रगति की आधारशिला - संघर्ष
    by Rajesh Maheshwari
    • 252

      प्रगति की आधारषिला - संघर्ष                                              म.प्र. के महाधिवक्ता श्री राजेंद्र तिवारी (83 वर्ष) विधि के क्षेत्र में एक चिरपरिचित व्यक्तित्व तो हैं ही साथ ही दर्शन, इतिहास ...

    मन के हारे हार - मन के जीते जीत 
    by JYOTI PRAKASH RAI
    • 354

    ईश्वर की कृपा से अगर आपका शरीर क्रियाशील है तो फिर आपको यह कभी नहीं सोचना चाहिए की यह कार्य बहुत कठिन है अथवा यह मुझसे नहीं होगा। आधुनिक ...

    इंसानियत
    by Rajesh Kumar
    • 308

    यह प्रसंग मेरे बाल्यकाल की एक सच्ची घटना पर आधारित है। मैं दसवीं कक्षा में पढ़ता था। मैंने उत्तरप्रदेश पॉलिटेक्निक संयुक्त प्रवेश परीक्षा हेतु आवेदन किया था। मैं घर ...

    अंदाज
    by Vinay Panwar
    • (11)
    • 306

                            अंदाज                       *******           "अपनी ...

    प्रभु कृपा
    by Rajesh Maheshwari
    • 178

    प्रभु कृपा                                                                                                                म.प्र. के जाने माने शल्य चिकित्सक डा. ओ.पी. मिश्रा (94 वर्ष) जबलपुर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के शल्य चिकित्सा विभाग में विभागाध्यक्ष

    देस बिराना - 32 - अंतिम भाग
    by Suraj Prakash
    • 342

    देस बिराना किस्त बत्तीस तीन दिन तो हमने आपस में ढंग से बात भी नहीं की थी। सिर्फ चौंतीस दिन की सैक्सफुल और सक्सैसफुल लाइफ थी मेरी और मैं ...

    देस बिराना - 31
    by Suraj Prakash
    • 294

    देस बिराना किस्सा इकतीस मेरा वहां यह तीसरा दिन था। ये तीनों दिन वहां मैंने एक मेहमान की तरह काटे थे। जब घर के मालिक की हालत ही मेहमान ...

    विद्यादान
    by Rajesh Maheshwari
    • 302

    विद्यादान               परिधि एक संभ्रांत परिवार की पुत्रवधू थी। वह प्रतिदिन अपने आस-पास के गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाती थी। उसकी कक्षा में तीन चार दिन पहले ही ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 49 - अंतिम भाग
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (20)
    • 530

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-49 परम ने तनु को बताया नहीं था कि वह आ रहा है। वहाँ पहुँचकर वह उसे सरप्राईज देना चाहता था। तभी ...

    उड़ान
    by Dr. Vandana Gupta
    • 462

    "मैडम...! लीजिए मिठाई खाइए" मेरे सामने नसरीन खड़ी थी.. गर्वित चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक लिए.."अरे बेटा..तुम! आओ कैसी हो? कहाँ हो आजकल?" उसे इतना खुश देखकर मैं पाँच ...

    देस बिराना - 30
    by Suraj Prakash
    • 328

    देस बिराना किस्त तीस हॉस्टल में हमारा यह तीसरा दिन था। आखिरी दिन। बड़ी मुश्किल से हमें एक और दिन की मोहलत मिल पायी थी। इतना ज़रूर हो गया ...

    आगे बढ़ो और बढ़ते ही जाओ
    by Rajesh Maheshwari
    • 290

    आगे बढ़ो और बढ़ते ही जाओ   सुप्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सतीशचंद्र दत्त (85 वर्ष) फौजदारी मामलों के विशेषज्ञ है। उन्होंने सन् 1953 में वकालत का पेशा अपनाया था ...

    देस बिराना - 29
    by Suraj Prakash
    • 324

    देस बिराना किस्त उन्तीस उन्हीं दिनों हमारे ही पड़ोस के एक लड़के की पोस्टिंग उसके ऑफिस की लंदन शाखा में हुई। जाने से पहले वह मेरे पास आया था ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 48
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (12)
    • 524

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-48 ''न.... नहीं यहाँ कोई तहखाना नहीं है।" अकरम हड़बड़ा कर बोला। ''अबे तू तो यहाँ किसी के होने से भी इनकार ...

    अंतिम डगर
    by Nikunj Patel
    • 262

    अंतिम डगर मुश्केली सभी को होती है पर हस्ते मुश्कुराते इससे लड़ने की हिम्मत सबके पास नहीं होती. कुछ लोग हार मान लेते है और खुद को अकेला और कमजोर ...

    फ़ितरत मासूम सी
    by Bhavna Jadav
    • 254

    हररोज की तरह रोजमरा की जिंदगी चल रही थी । एक दिन कुछ हल्की सी चिलचिलाहत सुनाई द मेरे आँगन के पास सुबह उठकर मने देखा तो मेरे घर ...

    देस बिराना - 28
    by Suraj Prakash
    • 332

    देस बिराना किस्त अठाइस धीरे धीरे अंधेरे में उनकी आवाज उभरती है। - मेरा घर का नाम निक्की है। तुम भी मुझे इस नाम से बुला सकते हो। जब ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 47
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (13)
    • 528

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-47 भारी घुसपैठ के चलते एरिया में हाई अलर्ट लग गया था। सबकी छुट्टियाँ कैंसिल हो गयी थीं। अगले पन्द्रह दिनों में ...