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    आशा की किरण...
    by Shaimee oza Lafj Verified icon
    • 4

    आशा की किरण.......       जीवन एक किताब है,हर एक पन्नो मे पहेलीयाँ जीसे सुलझाने में पुरी उम्र बीत जाती है।जींदगी का हर एक मोड हमको कुछ न कुछ ...

    जीवन चक्र
    by Rajesh Maheshwari Verified icon
    • 9

    जीवन चक्र    म.प्र. के सुप्रसिद्ध शिशु रोग विषेषज्ञ डा. कंवर किशन कौल (86 वर्ष) मूलतः काश्मीर के निवासी है। वे मेडिकल कालेज जबलपुर में शिशु रोग विभाग के ...

    देस बिराना - 11
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (1)
    • 8

    देस बिराना किस्त ग्यारह गोल्डी के इस तरह अचानक चले जाने से मैं खाली-खाली सा महसूस करने लगा हूं। हर बार मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है कि ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 30
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (7)
    • 63

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-30 फिर परम ने कॉलबेल बजा दी। चाचा ने तुरंत ही दरवाजा खोला। वो शायद बड़ी व्यग्रता से उन दोनों की राह ...

    देस बिराना - 10
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (2)
    • 42

    देस बिराना किस्त दस गोल्डी से इस बीच एक दो बार ही हैलो हो पायी है। वह भी राह चलते। एक बार बाज़ार में मिल गयी थी। मैं खाना ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 29
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (9)
    • 122

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-29 खाना खाने के बाद सब लोग वापस ड्राईंगरूम में बैठ गये और फिर से गप्पे मारने का दौर शुरू हो गया। ...

    रहस्य - 1
    by अमिता वात्य
    • (6)
    • 151

    छोटी थी तब मां मुझे खिलौने देकर बैठा दिया करती थी और खुद को दूसरे कमरे मे बंद करके जाने क्या बजाती थी , पर वो जो भी था ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 28
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (6)
    • 144

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-28 तनु और परम लगभग रोज ही ऑफीस चले जाते। तनु के पिताजी के साथ बैठना परम को भी बहुत अच्छा लगता। ...

    खुदा की खोज - 1
    by Parmar Geeta
    • (20)
    • 256

    एक लड़का था। उसका नाम दाऊद था। वो बहुत ही भोला था। उसकी बुढी माँ मरियम उसको बहुत ही प्यार करतीं थीं। और उसका ध्यान रखती थी। वो लोग बहुत ...

    मिरर इमेज लिखने के शोक ने लिखवाई विश्व प्रशिद्ध पुस्तकें
    by Piyush Goel
    • (5)
    • 219

    मिरर इमेज लिखने के शोक ने लिखवाई विश्व प्रसीद पुस्तकेंदुनिया में एक से एक कलाकार मौजूद है जिनकी प्रतिभा देखकर लोग चमत्कार समझने लगते है। ऐसे ही एक कलाकार ...

    'आवारा नहीं बेसहारा', घर की रोशनी
    by Gyan Prakash Peeyush
    • (5)
    • 174

    'आवारा नहीं बेसहारा'"उमाशंकर जी! आप सैर करने जाते समय हाथ में छड़ी लेकर नहीं जाते आपका शरीर भारी है, उम्र भी अस्सी के पार हो चली है। शरीर का ...

    देस बिराना - 9
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (2)
    • 63

    देस बिराना किस्त नौ समझ में नहीं आ रहा, किन झमेलों में फंस गया हूं। जब तक घर नहीं गया था, वे सब मेरी दुनिया में कहीं थे ही ...

    अनपढ़ कौन
    by Bhupendra Dongriyal
    • (1)
    • 171

    (सत्य घटना पर आधारित मेरे जीवन का एक रोचक संस्मरण)                              "अनपढ़ कौन?"                यह ...

    पुण्यतिथि
    by Vinay Panwar Verified icon
    • (1)
    • 153

           "आज आपकी पुण्यतिथि,फिर वही रिश्तेदारों के फोन,वही गम में शरीक होने के ढोंग,थक चुकी हूँ इन सबसे अब ये बोझ नही उठाया जाता।"निखिल की तस्वीर को ...

    प्रेम का बंधन
    by Rajesh Maheshwari Verified icon
    • (3)
    • 229

                                                            प्रेम का बंधन            अमेरिका के न्यूजर्सी शहर में राजीव अपनी पत्नी मोनिका, दो बच्चों राहुल 12 वर्ष और रंजीता 08 वर्ष के साथ रहकर स्वयं का ...

    देस बिराना - 8
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (1)
    • 85

    देस बिराना किस्त आठ देवेंद्र जी के साथ उस दिन की बातचीत के कुछ दिन बाद ही अलका दीदी ने घेर लिया है। उनके साथ बैठा चाय पी रहा ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 27
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (9)
    • 167

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-27 परम वहाँ से निकलकर तनु के ऑफिस की ओर चल पडा। आज वह बहुत खुश था। चाचा-चाची ने उसे सही मान ...

    देस बिराना - 7
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (2)
    • 97

    देस बिराना किस्त सात तो ... अब ... हो गया घर भी..। जितना रीता गया था, उससे कहीं ज्यादा खालीपन लिये लौटा हूं। तौबा करता हूं ऐसे रिश्तों पर। ...

    पहले आप नही पहले मैं
    by Ajay Kumar Awasthi
    • (1)
    • 141

    जागरूकता के लिए खुद से पहल हो !   घर की व्यवस्था हमारी होती है और चॅूंकी हम वहॉं रहते हैं इसलिए उसकी साज सम्हाल में हम कोताही नही बरतते ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 26
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (9)
    • 199

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-26 तनु को ऑफिस में छोडकर परम अपने चाचा के घर की ओर निकल गया। रास्ते भर मन में विचारों का तूफान ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 25
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (8)
    • 193

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-25 पूरे बगीचे में परम और तनु के मनपसंद पेड़-पौधे लग चुके थे। बगीचे के एक कोने में पत्थर की फर्शी पर ...

    नौकरी
    by JYOTI PRAKASH RAI
    • (8)
    • 257

    नौकरी - जीवन का सबसे कठिन कार्य है की किसी के यहाँ नौकरी कर लेना, यदि आप बहुत पढ़े लिखे होते हुए भी किसी ऐसे धनवान व्यक्ति के पास ...

    देस बिराना - 6
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (3)
    • 112

    देस बिराना किस्त छह लौट रहा हूं वापिस। एक बार फिर घर छूट रहा है..। अगर मुझे ज़रा-सा भी आइडिया होता कि मेरे यहां आने के पांच-सात दिन के ...

    देस बिराना - 5
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (1)
    • 122

    देस बिराना किस्त पांच इस वक्त मेरा सारा ध्यान उस करतार सिहां की तरफ है जो अपनी लड़की मेरे पल्ले बांधने की पूरी योजना बना कर आया हुआ है। ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 24
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (8)
    • 187

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-24 ''एक बार पता नक्सलियों के पीछे हम पन्द्रह दिनों तक रात दिन जंगलों में घूमते रहे थे। हम दस लोग थे ...

    देस बिराना - 4
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (3)
    • 137

    देस बिराना किस्त चार आगे कोतवाली के पास ही नंदू का होटल है। चलो, एक शरारत ही सही। अच्छी चाय की तलब भी लगी हुई है। नंदू के हेटल ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 23
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (6)
    • 185

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-23 दूसरे दिन सुबह तनु की नींद खुली तो सूरज निकल आया था परम विस्तर पर नहीं था। वह उठकर नीचे आयी ...

    एक जिंदगी - दो चाहतें - 22
    by Dr Vinita Rahurikar
    • (8)
    • 233

    एक जिंदगी - दो चाहतें विनीता राहुरीकर अध्याय-22 दूसरे दिन तय समय पर तनु के माता-पिता उनके घर आए। तनु ने दोपहर से किचन में लगकर उनकी पसंद का ...

    देस बिराना - 3
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (5)
    • 133

    देस बिराना किस्त तीन आंगन में चारपाई पर लेटे लेटे गुड्डी से बातें करते-करते पता नहीं कब आंख लग गयी होगी। अचानक शोर-शराबे से आंख खुली तो देखा, दारजी ...

    देस बिराना - 2
    by Suraj Prakash Verified icon
    • (3)
    • 227

    देस बिराना किस्त दो मैं हौले से सांकल बजाता हूं। सांकल की आवाज थोड़ी देर तक खाली आंगन में गूंज कर मेरे पास वापिस लौट आयी है। दोबारा सांकल ...