भाग - 3 वो धीरे से उठी और रोज़ की तरह बिना किसी आवाज़ के रसोई में चली गई चूल्हा जलाते ही आग की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी उसके चेहरे पर वही शांति थी, लेकिन आँखों के नीचे हल्की थकान भी साफ़ दिख रही थीकुछ ही देर में माँ भी आ गईमाँ- “आज देर नहीं हो गई?”रवीना- “नहीं माँ समय से ही उठी हूँ”माँ ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा—माँ- “स्कूल में टीचर हो तो थोड़ा अपने आप पर भी ध्यान दिया करो ये