अध्याय 3 — मोहब्बत के इकरार पर जज़्बात की उलझनमेहंदी की रस्म खत्म हो चुकी थी।घर में सब लोग हँसी-मज़ाक और डांस में व्यस्त थे, लेकिन ज़ोया का ध्यान बार-बार अमन की तरफ जा रहा था।अमन भी हर थोड़ी देर में चोरी-छिपे उसे देख लेता।रात को शोर-शराबे से दूर ज़ोया छत पर चली गई।ठंडी हवा उसके चेहरे को छू रही थी।“तुम यहाँ हो…” पीछे से अमन की आवाज़ आई।ज़ोया ने पलटकर देखा।“बस… थोड़ा अकेले रहना था,” उसने धीमे से कहा।अमन उसके पास आकर खड़ा हो गया।कुछ देर दोनों के बीच खामोशी रही।फिर अमन ने गहरी साँस ली।“ज़ोया, मैं तुमसे एक