चिप में कैद ज़िंदगीलेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनातकनीक ने इंसान को जितना आज़ाद किया है, उतना ही कैद भी। यह कहानी एक ऐसे भविष्य की है जहाँ इंसान की यादें, भावनाएँ और ज़िंदगी एक चिप में कैद कर दी जाती हैं। सवाल यह है—क्या यह अमरता है या कैदखाना?---पहला अध्याय: प्रयोगशाला की खामोशीरात के सन्नाटे में डॉ. आरव अपनी प्रयोगशाला में बैठा था। उसके सामने एक चमकती हुई माइक्रोचिप थी। यह कोई साधारण चिप नहीं थी—इसमें इंसान की पूरी चेतना, उसकी यादें, उसका व्यक्तित्व कैद किया जा सकता था। आरव सोच रहा था—"क्या इंसान को मौत से बचाने का यही रास्ता है?