यह चांदनी है।सुबह का समय था। गंगा के किनारे, ऋषिकेश में मैं कुछ पढ़ रहा था। तभी सामने से एक आवाज़ आई, "भैया, 'बोहनी' करा दो न।"मैंने जैसे ही सर उठाया, सामने देखा तो एक छोटी लड़की हाथों में फूल लिए खड़ी थी। मैंने कहा, "मेरे पास अभी रुपए नहीं हैं।"वह थोड़ी देर खड़ी रही और मेरी किताब की तरफ देखती रही। यह देखकर मैंने पूछा, "क्या आप स्कूल जाती हो?"उसने हँसकर जवाब दिया, "हाँ भैया।""किस कक्षा में हो?" मैंने पूछा।"भैया, थ्री (3)!"मैंने धीरे से बात आगे बढ़ाई और पूछा, "आपका नाम क्या है?""भैया, चांदनी।""आप आज स्कूल क्यों नहीं गईं?"