Ishq ka Ittefaq - 14

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मेहरा मेंशन की उन आलीशान और ठंडी दीवारों के पीछे छिपे रहस्यों का सबसे भयावह अध्याय उस रात फार्महाउस पर खुलना था. कबीर मेहरा, जिसे लगता था कि वह दुनिया के हर इंसान की फितरत अपनी उंगलियों के पोरों से पढ सकता है, आज खुद अपनी ही बनाई गई धारणाओं के चक्रव्यूह में फंसा हुआ था. उसकी काली एसयूवी जब फार्महाउस के अंधेरे अहाते में रुकी, तो सन्नाटा इतना गहरा था कि टायरों की रगड भी किसी चीख जैसी सुनाई दे रही थी. गाडी के भीतर की हवा एसी की वजह से बर्फीली थी, लेकिन कबीर और सिया के बीच