अभी सिया अपनी सिसकियों पर काबू पा ही रही थी कि फार्महाउस के गेट पर सायरन की गूँज और भी तेज हो गई. तभी DGP खुद अपनी सरकारी गाडी से नीचे उतरे, उनके चेहरे पर घबराहट और कबीर के खौफ की लकीरें साफ दिख रही थीं. उन्होंने पीछे मुडकर इशारा किया और दो हट्टे- कट्टे पुलिसवालों ने उस दरिंदे दिग्विजय सिंह को लगभग हवा में लटकाते हुए बाहर निकाला. DGP ने खुद आगे बढकर, कबीर के सामने झुकते हुए, उस कातिल को कबीर के जूतों के पास झटके से पटक दिया. DGP की थरथराती आवाज गूँजी, मेहरा साहब, ये रहा आपका