तूफ़ानी राह

गाँव की बारिश ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया था। शाम के साढ़े छह बजे सूर्यास्त हुआ, और देखते ही देखते आसमान में काले घने बादल छा गए। पेड़ झुक-झुककर काँप रहे थे, बिजलियां चमक रही थीं और बादलों की गड़गड़ाहट पूरे घर में गूंज रही थी।नीलम कमरे में अकेली बैठी थी। उसके हाथ में माता-पिता की दी हुई शादी की बायोडाटा  थी। "क्या बताऊं तुझे... बहुत सुशील लड़का है। अपना अच्छा बिजनेस है उसका। तुझे किसी चीज की कमी नहीं होगी," माँ की आवाज में ममता तो थी, लेकिन उतनी ही सख्ती भी थी। वह समझाना नहीं, बल्कि