आज दोपहर मैं ऋषिकेश के एक लोकधार्मिक प्रतिष्ठित मंदिर में बैठा था। वहाँ बैठे-बैठे मुझे हर थोड़ी देर में एक जैसी कहानियाँ बार-बार सुनाई दे रही थीं। कौतूहलवश जब मैं सच जानने के लिए थोड़ा और नज़दीक आया, तब जाकर स्थिति स्पष्ट हुई। वे कहानियाँ वास्तव में मंदिरों के गाइड वहाँ आने वाले लोगों (लोकधार्मिक श्रद्धालु) को सुना रहे थे।वे ऐसी-ऐसी कहानियाँ थीं, जिन्हें सुनते ही साफ पता चल जाए कि ये पूरी तरह तर्कहीन और विवेकहीन हैं। वे गाइड लोगों को अंधविश्वास से भरी कहानियाँ बेच रहे थे और लोग भी उन्हें बड़े आश्चर्य से सुनकर कुछ रुपयों