Best Philosophy stories in hindi read and download free PDF

परिचय - मेरे साथ चाणक्य निती
by Nimish Pansuriya
  • 56

             "चाणक्य नीति " , जब यह पुस्तक लोगों के सामने आती है तब अधिक प्रमाण में लोग इस पुस्तक को एक राजनीतिक मुद्दे ...

किर_दार 2
by sk hajee
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हम किर_दार के माध्यमसेहमारे बिच रहने वाली सोच को उजागर करने का प्रयास कर रहे है । बार-बार बदलने वाली इन्सानी फ़ितरत, लालच ... जरूर देखें और लाइक, कंमेट, शेयर ...

कैसा हक ?
by Sonu Kasana
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बीरबल के 2 पुत्र थे तथा उसकी पत्नी काफी अच्छी थी वे सब बहुत खुश थे बीरबल प्रतिदिन कार्य पर जाता तथा आजीविका कमा कर के लाता था। प्रतिदिन ...

सच : एक रहस्य
by Radhika Setia
  • 1.1k

कहने को तो बस कहानी है पर किसे पता यह सच है या कल्पना। आज मैं कहानी लिख रही हूं जिसमें ना तो राजा है ना रानी है, ना ...

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की.?
by Archana Yaduvanshi
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सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की...?सुशांत सिंह राजपूत ने ख़ुदकुशी कर ली. मात्र चौंतिस साल की उम्र में एक सफल एक्टर, प्रसिद्ध व्यक्तित्व और शरीर से स्वस्थ इंसान ...

नहीं बनना हैडलाइन
by Shobhana Shyam
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एक ओर छल कपट, निष्कासन , एकाकी होने का दंश दूसरी ओर घर चलाने के लिए पाई-पाई का संघर्ष , सुगंधा तन मन से टूट चुकी थी| उस पर ...

स्वर्णिम भारत की और......
by Rishi Sachdeva
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कठिन समय है, मानवीय संवेदनाएँ काँच की तरह होती है, कब टूट जाये , पता ही नहीं लगता।मनोवैज्ञानिकों का कहना कि आज जो परिदृश्य है, उसमें आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक ...

दुःख या अवसाद
by Roopanjali singh parmar
  • 288

कुछ लोग इतने दुःखी होते हैं, कि जरा सी बातें ही इनकी आंखों को भर देती हैं। दुःख इस हद तक इनमें शामिल होता है कि ये सुख और ...

विचार !!
by Shubham Dudhat
  • 1.1k

अभी आप जो सोच रहे हो वही आपके विचार है या नही ?? जरा सोचिए।। क्या आप उसे रोक सकते हो?? हा, जरूर ।। पर उसके लिए आपको अपने ...

लॉक डाउन के पन्ने - प्रकृति कुछ कहती है :
by Rishi Sachdeva
  • 1k

"ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा" और निश्चित रूप से ये समय भी जीवन में दुबारा नहीं आएगा।अधिकांश लोगों का मानना है कि ये मानव निर्मित अभिशाप है, कुछ का कहना ...

कलियुग का मित्र - INTERNET - 1
by ADARSH PRATAP SINGH
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आइये हम जानते है कि इस कलियुग में बन रहे नए मित्र जैसे “INTERNET” दौर कलियुग का है जहाँ व्यक्ति ही असुर है और वही देवता है। भेदभाव करने ...

परिस्थिति - कुछ सवाल और एक सोच
by Priya Saini
  • 515

हम  सदा परिस्थितियों पर ही निर्भर रहते हैं। परिस्थिति हमारे अनुकूल हो तो सब अच्छा लगता है और विपरीत हो तो वक़्त खराब लगता है। क्या परिस्थिति के खिलाफ़ ...

बचपन का डर
by ADARSH PRATAP SINGH
  • 509

“अंधेरा ,डर दोनो का मेल अंधा स है प्रकाश के आते ही दोनों गायब से हो जाते है” {मेरी तरफ वो आदमी चलता ही आ रहा था। वो डरावना ...

सुराख से झाँकती ज़िंदगी
by Dr. Vandana Gupta
  • (12)
  • 531

     मम्मा से लड़कर, गुस्सा होकर अपनी सहेली के घर गयी स्वरा तुरन्त ही लौट आयी थी . रह रहकर दोनों घरों की तस्वीर उसकी आँखों के सामने ...

प्रकृति मैम - मुकाम ढूंढें चलो चलें ( अंतिम भाग)
by Prabodh Kumar Govil
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मुकाम ढूंढें चलो चलेंकफ परेड के पांच सितारा प्रेसिडेंट होटल में मैं बैठा था। वहां अगली सुबह जल्दी एक कार्यक्रम होना था। तैयारी के लिए रात को वहां रुकने ...

पानी : तुम मुझे बचाओ में तुम्हे बचाऊंगा
by paresh barai
  • 446

पानी हमारे जीवन की एक बेहद अहम् ज़रूरत है | भोजन के बिना व्यक्ति भले ही दिनों दिन तक जीवित रह ले, परंतु प्यास लगने पर एक पहर भी ...

प्रकृति मैम - छू सको तो छू लो
by Prabodh Kumar Govil
  • 619

छू सको तो छू लोजिस लड़के को मैं स्टेशन से ले आया था उसे कुछ समय बाद उसके चाचा का पत्र आ जाने पर मैंने कुछ पैसे देकर, बिहार ...

प्रकृति मैम - लहर को प्यास से क्या
by Prabodh Kumar Govil
  • 600

 लहर को प्यास से क्याकुछ पत्रिकाएं दीवाली पर साहित्य के ख़ास अंक भी निकाला करती थीं। "सबरंग" के कहानी विशेषांक के लिए नई कहानी ढूंढने के लिए एक दिन ...

सर्वश्रेष्ठ जीवन उद्धरण हिंदी में
by devesh bagla
  • 525

नमस्कार नीचे दिए गए कुछ जीवन उद्धरण पढ़ें. १. जीवन इतना सरल है जब आप लोगों को खुद को समझाना बंद कर देते हैं और सिर्फ वही करते हैं जो ...

जिवनसाथी ओर भ्रम
by Shrimali Monty
  • 726

I am A little pancil in the hend️ of mahakal sending A true letter of fortune and spiritual‍life to the people of this world॰॰ ॐ Namah Shivay

गोविंद जी की खीर।
by सुप्रिया सिंह
  • 545

गोविंद जी का पूरा ध्यान किचिन से आने वाली सुगंध पर ही लगा है । 75 साल के हो गए हैं पर खाने -पीने के मामले में अपने 5 ...

मेरा क्या कसूर है ?
by Sanjay Verma
  • 510

मेरा क्या कसूर है ?बुजुर्गो का आशीर्वाद ,सलाह सदैव  काम आती है ये  उनके पास  अनुभव का ऐसा अनमोल खजाना होता है जिनको पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे प्रेरणा स्वरूप ...

प्रकृति मैम - पास भी, दूर भी
by Prabodh Kumar Govil
  • 794

ठाणे मुंबई के पास बिल्कुल सटा हुआ जिला था। वहां लोग कहते थे कि यहां व्यस्ततम विराट महानगर मुंबई की असुविधाएं अभी नहीं पहुंची हैं पर सुविधाएं पहुंच गई ...

॥धूणी॥
by Yayawargi (Divangi Joshi)
  • 604

॥धूणी॥कोई प्रेम-कहानी होगी किसी लड़की की, जिसका नाम धुणी होगा या शायद कोई लड़का है जिसको किसी लड़की की धून लग गयी है यह समज आए हो तो यही ...

तरीका
by Dr. Vandana Gupta
  • 704

     मैं फ्री होकर बैठी ही थी कि एक महीन सी आवाज़ आयी... "मैडम..! मे आई गेट इन?" वह कॉमर्स की एक स्वीट सी छात्रा थी, मुझे नाम ...

मासूम सपने
by Pallavi Saxena
  • 752

सरकारी स्कूल के बच्चों को मोबाइल के लिए लड़ते देख विज्ञान के मास्टर जी बोले चलो बच्चों आज हम विज्ञान के विषयों के बारे में चर्चा करेंगे। आज उसके ...

प्रकृति मैम - विकल्पों की मौजूदगी
by Prabodh Kumar Govil
  • 554

15. विकल्पों की मौजूदगीमेरे घर से थोड़ी ही दूर पर एक मकान में तीन लड़के रहते थे, जो कोल्हापुर में एम बी ए करने आए हुए थे।मेरे सभी मित्र ...

मेरा साया.. एक आसमान..
by Tarun Kumar Saini
  • 709

मेरा साया.. एक आसमान.. जो महसूस होता है, हर पल, हर जगह, क,मेरा अपना है, एक हमदद क तरह, सदा मेरे साथ है, यक, यही एक मेरा, अपना है... ...

प्रकृति मैम - ठिकाने, ज़ायके, पोशाक
by Prabodh Kumar Govil
  • 532

ठिकाने ज़ायके पोशाकजब हम घर से कहीं बाहर जाने के लिए निकलते हैं तो एक उलझन मन ही मन हमें बेचैन करती रहती है। हम सोचते हैं कि दुनिया ...

प्रकृति मैम - दिल्ली
by Prabodh Kumar Govil
  • 843

.दिल्ली दिल हिंदुस्तान कालोधी रोड वाला मकान काफ़ी छोटा था। लेकिन जल्दी ही हमें साकेत में बड़ा मकान मिल गया।पत्नी का ऑफिस आर के पुरम में था और मेरा ...