पिता और अन्य कहानियाँ, भाग-1

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#  पिता #सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किसी भी चीज़ की कमी अपर्याप्तता उनके दरवाजे पर कभी अपनी अप्रिय  नागवार दस्तक नहीं दे सकी थी। दूर दूर तक उनकी  कीर्ति भूति  का यश फैला हुआ था। अपनी जवानी के दिनों में तकरीबन सभी तरह के ऐब पाले होंगे उन्होंने, लेकिन अधेड़ उम्र के आगे की दहलीज पार करने के साथ ही