पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 13

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गंगा किनारे की उस मुलाकात के बाद…राधा के अंदर कुछ बदलने लगा था। वो अब पहले जैसी नहीं थी। काम करते-करते अचानक रुक जाती…लैपटॉप की स्क्रीन घूरती रहती…और बिना वजह उसके दिल की धड़कन तेज़ हो जाती। कृष्णा की बातें दिमाग में घूमती रहतीं —मेरी सिद्धिका…वो मुझसे बहुत प्यार करती थी…वो वैंपायर थी…ये शब्द बार-बार उसके दिमाग में घूम रहे थे।उस रात…राधा को फिर सपना आया। काले आसमान के नीचे वो खड़ी थी…उसके पीछे पंख खुल रहे थे…और सामने कृष्णा खड़ा था—सिद्धिका…राधा हड़बड़ा कर उठ गई। पूरा शरीर पसीने से भीगा था।वो बोली - ये सपना क्यों आ रहा है मुझे…?उसी