तुम भी - 1

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नवंबर का महीना था। ठंड से भरी सुबह में ऊपर वाले कमरे की खिड़की खोलते हुए नैना बोली,“उठो बच्चों! स्कूल नहीं जाना तुम्हें? देर हो जाएगी और छुट्टी के कोई बहाने नहीं चलेंगे...”यह सब कहकर वह नीचे आई और रसोई में नाश्ता बनाने लगी। सभी बच्चे — प्रिया, खुशी, रूही और शैतान आरव — धीरे-धीरे तैयार होकर आ गए।सबको नाश्ता कराने के बाद नैना खुद तैयार हुई और बच्चों को स्कूल छोड़ने चली गई। वहाँ से वह अपने स्कूल के लिए निकली, जहाँ वह अध्यापिका थी। आज उसकी नई नौकरी का पहला दिन था। वह बहुत खुश थी, लेकिन उतनी