जंगल - 40

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 51 वा धारावाहिक "अर्थ " कहानी के माधम से जान लो।जिंदगी का मतलब समझ जाओ, तो ये बे अर्थ सी लगती है अगर स्टॉक मार्किट की तरा लोगे तो मतलब और होगा... तुम इस से खेलो नहीं, हरी को आपने अंदर ढूंढो। बनवारी की आँखे भरी हुई थी, जैसे किसे प्रिये को छोड़ कर चले हो। गुरू जी से आशीर्वाद ले कर आ गया था... पता कयो उसे पता था गुरू जी से उलट की अभ वो कभी यहां न आ सकेगा.... अकल आराम से गाड़ी चलाते जा रहे थे। सवा चार वजे के करीब पुरानी छावन्नी अम्बाला की कार