उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा उसकी इस अदा पर पहले से ही फिदा थी। वह शलभ को मना कर भी नहीं सकती थी, फिर भी बनावटी नाराज़गी दिखाते हुए बोली—"यह सब क्या है? ऐसे रास्ता चलते कोई किसी से इस तरह कहता है क्या?"शलभ उसके चेहरे के भाव पढ़ चुका था। उसने हल्की मुस्कान दबाई और दूसरी ओर देखने लगा। उमा धीरे से उसके पीछे आई और उसके कंधे से लगते हुए बोली—"तुम्हें तो यार, मनाना भी नहीं आता। चलो, मैं ही मान जाती हूँ।"दोनों हँस