कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी जब पीछे से एक तीखी आवाज़ आई ! “ये क्या, तुमने मेकअप क्यों नहीं किया? चेहरा देखो कितना काला लग रहा है। एक तो पहले से ही रंग दबा हुआ है ! और तुम हो कि चेहरे पे कुछ लगाती ही नहीं हो! बस इसलिए कितनी बार रिजेक्ट हो चुकी हो ! सब यही कहते हैं, रंग दबा हुआ है!गर मेरी हेलो असल में बारह बरश का इंतज़ार कहानी एक उपन्यास है इसके और भी पार्ट है मैंने उसको गलती से कहानी शैली में डाल दिया है ! इसलिए अगर आप लोगों को अगला पार्ट पढ़ना है तो आ पढ़ सकते हैं मैं डाल दूंगी ओके !