एपिसोड 4: झूठा जाल और हीर का तूफान"साज़िशें कितनी भी गहरी क्यों न हों, सच का दामन थामे हौसलों के आगे घुटने टेक ही देती हैं..."— समीर ख़ानकैदो अपनी बेइज़्ज़ती को भूलने वालों में से नहीं था। हीर की बेबाकी ने उसके अहंकार पर चोट की थी, और उसका बदला लेने के लिए उसने एक बेहद घिनौना जाल बुना। अगले ही दिन, जब रहमान (रांझा) अपने अपार्टमेंट में बैठकर गिटार पर एक नई धुन को कागज़ पर उतार रहा था, अचानक उसके दरवाज़े पर ज़ोर-ज़ोर से दस्तक हुई। रहमान ने जैसे ही दरवाज़ा खोला, सामने तीन पुलिस वाले खड़े थे।"रहमान