पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 17

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कृष्णा जैसे ही घर के अंदर पहुँचा…दरवाज़ा अपने आप पीछे से हल्के से बंद हो गया। घर में एक अजीब सी गर्माहट थी…जैसे सब कुछ पहले जैसा हो गया हो। रसोई से हल्की खुशबू आ रही थी…और वहाँ एक लड़की लाल साड़ी में खाना बना रही थी।लंबे बाल…वही चेहरा…वही मुस्कान…कृष्णा के कदम वहीं रुक गए। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़का जैसे टूट जाएगा…वो धीरे-धीरे आगे बढ़ा…वो बोला - सिद्धिका…?लड़की ने धीरे से पलटा…और मुस्कुरा दी।बोली - आ गए आप…उसकी आवाज़ बिल्कुल वही थी। वो हल्के से हँसी…वो बोली - ये क्या हाल बना रखा है आपने?पता है मैं कितनी परेशान थी इतने