© डॉ वंदना शर्मा, 2026 प्रथम संस्करण: 2026सर्वाधिकार सुरक्षित। इस पुस्तक का कोई भी अंश लेखिका की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुनरुत्पादित नहीं किया जा सकता। *प्रस्तावना: वो साल, जो कलम से बचा* *24 मार्च 2020, रात 8 बजे।* प्रधानमंत्री जी ने कहा - _"आज रात 12 बजे से पूरा देश... 21 दिन के लिए..."_ TV बंद हुआ। घर के दरवाजे बंद हुए। पर मेरे मन का एक दरवाजा खुल गया।मैं एक शिक्षिका हूँ। कवयित्री हूँ। माँ हूँ। बेटी हूँ। पत्नी हूँ। पर 2020 में सबसे पहले मैं *एक गवाह* बन गई। हर शाम आँकड़े आते थे - संक्रमित कितने, मृत्यु कितनी। हर सुबह