रात गहरी हो चुकी थी…कमरे में हल्की सी रोशनी जल रही थी।बाहर हवा धीरे-धीरे खिड़की से टकरा रही थी…और अंदर दो दिल एक ही जगह पर धड़क रहे थे। राधा धीरे-धीरे कृष्णा की बाहों में सिमट गई…जैसे उसे वहाँ सबसे ज्यादा सुरक्षा मिल रही हो। उसके चेहरे पर एक मासूम सी शांति थी…बिल्कुल एक सामान्य पत्नी की तरह।कृष्णा उसे देख रहा था…उसकी आँखें भर आईं। क्योंकि उसके लिए ये सिर्फ राधा नहीं थी ये उसकी “सिद्धिका” की वापसी जैसा एहसास था। भले ही अधूरा सही…वो खुद को रोक नहीं पाया…और धीरे-धीरे उसे पास से महसूस करने लगा।उसने उसके माथे पर