इश्क और इस्तीफा - 9

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काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के छींटे डाल दिए थे। "इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, सच का सामना करना समाधान है।" काव्या के ये शब्द विराज के कानों में बार-बार गूँज रहे थे। उसने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी आँखों में अब वह पुराना खालीपन नहीं था, बल्कि एक अजीब सी कशमकश और काव्या के प्रति एक गहरा सम्मान था, जो शब्दों के दायरे से परे था।"सच का सामना..." विराज की आवाज़ इस सन्नाटे में बेहद भारी सुनाई दी। उसने फर्श पर बिखरे नियति की तस्वीर के टुकड़ों