Part 11 का अगला पन्ना खोलते ही मैं कुछ देर तक उसे देखती रही।पता नहीं क्यों...अब इस कहानी को पढ़ते समय मुझे ऐसा महसूस होने लगा था कि मैं सिर्फ़ शब्द नहीं पढ़ रही हूँ।जैसे इन पन्नों में छिपी भावनाएँ मुझ तक पहुँच रही हों।कई बार तो मुझे खुद पर गुस्सा आने लगता था।आख़िर मैं इतनी बेचैन क्यों हो जाती हूँ?आख़िर अभिन्नव का नाम पढ़ते ही मेरा ध्यान बार-बार उन्हीं पर क्यों चला जाता है?मैंने फिर खुद को समझाया और पढ़ना शुरू किया।"9 मई 2025"उस दिन जब मैं और नयना निमंत्रण देने अभिन्नव के घर गए थे, तब उनकी दादी आँगन