क्या मैं मृत्युलोक में हूं? स्वर्ग आ पहुंचा हूं? धरती और आकाश के बाहर! तारामंडल से भी ऊपर!! जहां दुर्भाग्य का कोई झटका नहीं…. कुर्की का निपटारा नहीं….. ‘ही दैट डाएज़, पेज़ औल डेट्स….’ लिखा था शेक्सपियर ने ‘द टेम्पैस्ट’ में? जो मर