एपिसोड 7: आख़िरी धुन और भागने की तैयारीमोहब्बत जब इम्तिहान मांगती है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं... हौसले अगर बुलंद हों, तो तूफ़ान भी रास्ता बदल लेते हैं।"— समीर ख़ानकैदो के जाने के बाद हीर ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। वह अपनी गाड़ी में बैठी और जितनी तेज़ी से गाड़ी चला सकती थी, चलाते हुए रहमान के अपार्टमेंट की तरफ भागी। रास्ते भर कैदो की वो खौफनाक धमकियाँ उसके कानों में गूँज रही थीं। उसे अपने पिता की लाचारी और रहमान की जान का डर, दोनों एक साथ सता रहे थे। लेकिन वह हीर थी, जो मुश्किलों