संन्यास क्या है?

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संन्यास क्या है?संन्यास का अर्थ किसी चीज़ को छोड़ देना नहीं, बल्कि जीवन को ऐसे देखना है जहाँ चुनाव की गुलामी समाप्त हो जाती है।जहाँ मन “यह चाहिए, यह नहीं चाहिए” के बीच झूलता है, वहीं बंधन है; और जहाँ केवल देखना, समझना और स्वीकार करना रह जाता है, वहीं संन्यास है।संन्यास नेति-नेति का भी अंत नहीं, बल्कि उस बोध की अवस्था है जहाँ द्वैत और अद्वैत दोनों विचार भी केवल संकेत रह जाते हैं।उसके बाद न “मैं आस्तिक हूँ” बचता है, न “मैं नास्तिक हूँ”; न “मैंने त्याग किया” बचता है, न “मैंने कुछ पाया”।जो बचता है, वह केवल