चिड़चिड़ा

  • 333
  • 108

कहानी *चिड़चिड़ा*कभी-कभी सबको प्यार बाँटने वाला भी प्यार के लिए प्यासा रह जाता है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो दिल्ली की एमएनसी कंपनी में कार्यरत है। वर्कलोड के चलते हमेशा चिड़चिड़ा रहता है।दिल्ली की जून माह की एक आम सुबह। सात बजे ही दोपहर हो जाती है। विकास रोज की तरह सुबह नौ बजे बाइक से ऑफिस के लिए निकलता है। उसका ऑफिस नोएडा में है। घर से निकलते ही चिपचिपाती गर्मी, चुभती धूप और उसपर दिल्ली का ट्रैफिक। दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर हमेशा जाम ही रहता। गाड़ियों का धुआँ, हॉर्न भोंपू बजाते ,एक चुभता, कानों का चीरता