जिद्दी इश्क - 2

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                                                                    "माही उन फूलों से अच्छे-अच्छे बुक्के बनाकर देती है। फिर उसके मामी वह सारे बुक्के लेकर दुकान में देती है। इससे भी कुछ पैसे आ जाते हैं। सारा काम माही करती है। पर क्रेडिट चारुलाता जी ले जाती है।""रिमझिम........ अरे मेरी प्यारी आई मुझे पता है तुम दूसरे फूल ले आओगी। आए मेरे मेकअप का सारा सामान खत्म हो गए हैं। मुझे ₹1500 चाहिए था।"" चारुलता....... पैसे